बिहार के बक्सर में दो शिक्षकों पर 12 छात्राओं से दुष्कर्म और वीडियो वायरल करने का आरोप, ग्रामीणों ने पीटा

बिहार

बक्सर (बिहार): बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव प्रखंड से मानवता और गुरु-शिष्य की मर्यादा को तार-तार कर देने वाला शर्मनाक मामला सामने आया है।यहां एक सरकारी विद्यालय के दो शिक्षकों पर लगभग 12 नाबालिग छात्राओं के साथ यौन शोषण (रेप) करने और उनका आपत्तिजनक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने का बेहद संगीन आरोप लगा है। यह घिनौनी करतूत सामने आते ही समूचे क्षेत्र में भारी आक्रोश और तनाव फैल गया।

😡 वीडियो वायरल होने के बाद फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: शिक्षकों की जमकर पिटाई

ग्रामीणों का आक्रोश और प्रशासनिक हस्तक्षेप:

  • ग्रामीणों का धावा: तीन दिन पूर्व सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद परिजनों और ग्रामीणों को इस करतूत की जानकारी मिली। इसके बाद उग्र ग्रामीणों ने स्कूल पहुंचकर दोनों आरोपी शिक्षकों को घेर लिया और उनकी जमकर धुनाई कर दी।

  • पुलिस ने संभाला मोर्चा: सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित कर दोनों शिक्षकों को भीड़ से बचाया।

  • तत्काल निलंबन: जिला शिक्षा विभाग ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपी शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है।

⚖️ महीनों से चल रहा था घिनौना खेल: POCSO Act समेत गंभीर धाराओं में केस दर्ज

मामले की कानूनी पृष्ठभूमि और धाराएं:

  • लंबे समय से शोषण का आरोप: परिजनों के अनुसार, आरोपी शिक्षक पिछले कई महीनों से डरा-धमकाकर मासूम छात्राओं को अपनी हवस का शिकार बना रहे थे और उनका अश्लील वीडियो तैयार कर रहे थे।

  • पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज: कृष्णब्रह्म थाना पुलिस ने पीड़ित परिजनों के आवेदन के आधार पर बाल यौन अपराध संरक्षण कानून (POCSO Act) और आईटी एक्ट समेत भारतीय न्याय संहिता की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

👮 बक्सर एसपी शुभम आर्या और डीएसपी ने दी जानकारी: सख्त कार्रवाई के निर्देश

पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष:

  • अधिकारियों का बयान: बक्सर के पुलिस अधीक्षक (SP) शुभम आर्या और प्रभारी डीएसपी समीर कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि परिजनों के बयानों और वायरल वीडियो के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।

  • कड़े कानूनी कदम: पुलिस ने आश्वस्त किया है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित करते हुए मामले में स्पीडी ट्रायल और कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।

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