छत्तीसगढ़ में ‘तारीख पर तारीख’ बनेगी इतिहास: 3 साल में आएंगे आपराधिक मामलों के फैसले, रायपुर में ‘डिजिटल जस्टिस’ कार्यशाला

छत्तीसगढ़

रायपुर (छत्तीसगढ़): “तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख…” फिल्मों का यह सुप्रसिद्ध डायलॉग अब केवल फिल्मों और अदालती डायरी तक ही सीमित न रहे, यही दृढ़ संकल्प छत्तीसगढ़ सरकार ने लिया है।

रायपुर में आयोजित “स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस” (Strengthening Digital Justice) राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा तथा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने प्रदेश की न्याय व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी, वैज्ञानिक और समयबद्ध बनाने का महा-रोडमैप प्रस्तुत किया। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में जिला न्यायालय से लेकर सर्वोच्च अदालत तक किसी भी आपराधिक मामले के अंतिम फैसले में तीन वर्ष से अधिक का समय नहीं लगेगा।

🏛️ रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन, पुलिस, न्यायपालिका और अभियोजन पक्ष के शीर्ष अधिकारी रहे मौजूद

रायपुर के एक निजी होटल में “स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस” विषय पर भव्य राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने की। इस गरिमामयी अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव, न्यायमूर्ति चंद्रवंशी, हाईकोर्ट के अन्य माननीय न्यायाधीश, सभी जिलों के एसपी (SP), आईजी (IG), डीजीपी (DGP), न्यायिक अधिकारी तथा पुलिस एवं अभियोजन विभाग के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

⚖️ “समयबद्ध न्याय देना ही नए कानूनों का मुख्य उद्देश्य”: गृहमंत्री विजय शर्मा का संबोधन

अपने संबोधन की शुरुआत गृहमंत्री विजय शर्मा ने फिल्म के चर्चित संवाद से करते हुए कहा कि, “यह संवाद वर्षों से आम जनता की न्याय प्रणाली को लेकर बनी धारणा को दर्शाता है, किंतु अब इस औपनिवेशिक सोच को पूरी तरह बदलने का समय आ गया है।”

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, पुलिस और अभियोजन के मध्य अब बेहतर तालमेल स्थापित हो चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के प्रभावी क्रियान्वयन से भविष्य में किसी भी केस का निस्तारण 3 वर्ष में सुनिश्चित होगा।

💡 बदल गई न्याय व्यवस्था की सोच, आधुनिक अपराधों की जांच में कारगर होंगे नए कानून: सीएम विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में लागू किए गए नए आपराधिक कानून पूरे देश में प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किए जा रहे हैं और छत्तीसगढ़ इस दिशा में तेजी से अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने बताया कि पुलिस, अभियोजन व न्यायिक अधिकारियों को नए कानूनों का तकनीकी प्रशिक्षण देकर धरातल पर उतारा गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पुराने कानून ब्रिटिश काल के थे जब न सीसीटीवी कैमरे थे और न ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का महत्व था, जिससे जांच में भारी अड़चनें आती थीं।

📲 डिजिटल एविडेंस और फॉरेंसिक साइंस होंगे सबसे बड़े हथियार

मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि नए साक्ष्य कानून में डिजिटल एविडेंस को स्पष्ट कानूनी मान्यता दी गई है।

अब सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड्स (CDR), इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य अपराधों की जांच में मुख्य आधार बनेंगे। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक साइंस और वैज्ञानिक साक्ष्यों के बल पर अपराधियों को त्वरित सजा दिलाने में सहायता मिलेगी, जिससे कोई भी दोषी बच नहीं पाएगा।

📜 मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा का बड़ा संदेश: “अपराध स्थल से ही शुरू होती है निष्पक्ष जांच”

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि नए तीनों आपराधिक कानूनों के सफल क्रियान्वयन से राज्य की न्याय व्यवस्था अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक, त्वरित और तकनीक-आधारित बनेगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इन ऐतिहासिक कानूनों की वास्तविक सफलता उनके धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है। उन्होंने कहा कि न्याय की प्रक्रिया अपराध स्थल (Crime Scene) से ही शुरू हो जाती है; यदि शुरुआती जांच वैज्ञानिक, निष्पक्ष और डिजिटल रूप से सुरक्षित होगी, तो संपूर्ण न्यायिक प्रक्रिया बेहद मजबूत बनेगी।

💻 ई-साक्ष्य, ई-चालान और ‘न्याय श्रुति’ प्लेटफॉर्म पर विशेष जोर

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति और डिजिटल फॉरेंसिक्स जैसी प्रणालियां नए कानूनों की मूल भावना को साकार कर रही हैं।

ई-साक्ष्य प्रबंधन की एकीकृत प्रणाली से साक्ष्यों की प्रामाणिकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है। उन्होंने जानकारी दी कि अकेले जून माह के दौरान जिला न्यायालयों में लगभग 9,910 मामलों और हाईकोर्ट में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से की गई है।

🎯 प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल जस्टिस’ विज़न को जमीन पर उतारने की पहल

कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि गृह विभाग द्वारा आयोजित यह कार्यशाला प्रधानमंत्री के आह्वान पर त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का ठोस प्रयास है।

डिजिटल तकनीक, फॉरेंसिक साइंस और नए कानूनों के मजबूत ढाँचे से छत्तीसगढ़ न्याय क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने जा रहा है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य ‘तारीख पर तारीख’ की जगह पारदर्शी एवं समयबद्ध न्याय देना है।

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