रायपुर: छत्तीसगढ़ी फिल्मों के बाद अब राज्य के निर्माता और निर्देशक हिंदी फिल्मों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. जानकी हिंदी फिल्म के बाद छत्तीसगढ़ में अब एक और हिंदी फिल्म ‘मानव मार्केट’ पूरी तरह बनकर तैयार हो चुकी है. यह फिल्म मेडिकल स्कैम और स्वास्थ्य के बाजारीकरण जैसे गंभीर विषय पर आधारित है.
मेडिकल स्कैम पर आधारित है फिल्म की कहानी: फिल्म मानव मार्केट पूरी तरह से मेडिकल सिस्टम में हो रहे भ्रष्टाचार और स्कैम को उजागर करती है. इसमें दिखाया गया है कि किस तरह स्वास्थ्य सेवा को व्यापार बना दिया गया है. फिल्म में कुल चार गाने हैं और इसकी शूटिंग छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों में की गई है.
छत्तीसगढ़ के कलाकार और टेक्नीशियन ने किया काम: इस फिल्म की खास बात यह है कि इसमें काम करने वाले सभी कलाकार और टेक्नीशियन छत्तीसगढ़ के ही रहने वाले हैं. फिल्म की कहानी से लेकर अभिनय और तकनीकी टीम तक पूरी तरह स्थानीय प्रतिभाओं पर आधारित है.
नायक ओम त्रिपाठी ने निभाया अहम किरदार: फिल्म के नायक ओम त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने इस फिल्म में ईश्वर कुमार धृतलहरे का किरदार निभाया है. उनका किरदार एक आम इंसान का है, जो किसी तरह अस्पताल में वार्ड बॉय के रूप में काम शुरू करता है. वहां वह देखता है कि अस्पताल में इलाज के नाम पर पूरा बाजारीकरण चल रहा है. इसके बाद वह मेडिकल स्कैम के खिलाफ आवाज उठाता है.
फिल्म में एक छोटी सी लव स्टोरी के साथ पॉजिटिव और नेगेटिव सोच की लड़ाई भी देखने को मिलेगी.- नायक ओम त्रिपाठी
नायिका नेहा शुक्ला का किरदार: फिल्म की नायिका नेहा शुक्ला ने बताया कि उन्होंने इसमें काजल का किरदार निभाया है. यह फिल्म दिखाती है कि स्वास्थ्य एक सेवा होनी चाहिए, न कि धंधा. जब डॉक्टर को भगवान माना जाता है और वही स्कैम करें, तो आम इंसान कहां जाए?
यह फिल्म हर आम आदमी की कहानी है और देश की 140 करोड़ जनता से जुड़ा मुद्दा उठाती है.- नेहा शुक्ला, एक्ट्रेस
19 दिसंबर को रिलीज नहीं हो पाई फिल्म: फिल्म 19 दिसंबर को छत्तीसगढ़ के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन बॉलीवुड और हॉलीवुड की बड़ी फिल्मों के चलते इसे सिनेमाघरों में जगह नहीं मिल सकी. इस बात को लेकर निर्माता ने दुख भी जताया है.
जनवरी 2026 में रिलीज की तैयारी: फिल्म के निर्माता कैलाश चंद अग्रवाल ने बताया कि अब फिल्म को 16 जनवरी 2026 के आसपास रिलीज करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के सिनेमाघर अभी भी बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों के सामने स्थानीय फिल्मों को प्राथमिकता नहीं दे पा रहे हैं, जो चिंता का विषय है.
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