तेलंगाना में स्थानीय चुनाव चल रहे हैं. ऐसे में गांवों में दिलचस्प नजारे देखने को मिल रहे हैं. ये चुनावी समर रिश्तों पर भी भारी पड़ रहा है. कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहता है. वैसे तो आपने पंचायत चुनावों में भाई-बहन, बहनोई वगैरह को अलग-अलग पार्टियों के समर्थन से चुनाव लड़ते देखा होगा. मगर, यहां मां-बेटी आमने-सामने हैं. इससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है.
ये दिलचस्प चुनावी मुकाबला है जगतियाल जिले के कोरुतला मंडल में थिमैया पल्ले गांव का. यहां सरपंच चुनाव में मां और बेटी के बीच मुकाबला है. थिमैया पल्ले में सीट पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित है. इसके साथ ही शिवरात्रि गंगव्वा मैदान में उतरीं. इसके बाद उनकी बेटी सुमालता ने भी चुनाव लड़ने की घोषणा की. बीआरएस ने जहां शिवरात्रि गंगव्वा को समर्थन देने की घोषणा की, वहीं सत्तारूढ़ कांग्रेस ने बेटी का समर्थन किया है.
सुमालता की एक और दिलचस्प कहानी
अब ये दोनों मां-बेटी घर-घर जाकर अलग-अलग प्रचार कर रही हैं. सुमालता की अपनी दिलचस्प कहानी है. दरअसल, सुमालता को उसी गांव के एक व्यक्ति से प्यार हो गया था. इसके बाद उन्होंने शादी कर ली. तब से इन दोनों परिवारों के बीच दूरी आ गई. अब सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होने पर चुनावी मैदान में हैं. कुछ अन्य उम्मीदवार भी मैदान में हैं लेकिन चर्चा सबसे ज्यादा मां-बेटी की है.
क्या होगा इस सियासी जंग का परिणाम?
मां और बेटी के चुनाव लड़ने को लेकर दिलचस्प बहस चल रही है. दोनों ने पहले ही अपना डोर-टू-डोर अभियान तेज कर दिया है. जाति के आधार पर बैठकें कर रही हैं. कोई भी छोटा मौका छोड़े बिना प्रचार कर रही हैं. इसके अलावा अन्य ग्रामीण भी मां और बेटी द्वारा किए जा रहे प्रचार को देखने में रुचि दिखा रहे हैं. मां और बेटी के बीच इस सियासी जंग का क्या परिणाम होगा इसका हमें इंतजार करना होगा. फिलहाल, चुनाव दिलचस्प है.
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