हजारीबाग नाबालिग दुष्कर्म और नृशंस हत्या मामले में हाईकोर्ट सख्त; गृह सचिव और डीजीपी को जारी किया नोटिस

झारखण्ड

रांची: हजारीबाग के विष्णुगढ़ में नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद नृशंस हत्या मामले पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है. अधिवक्ता हेमंत सिकरवार ने सोमवार को जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष इस मामले को उठाया. अधिवक्ता धीरज कुमार ने बताया कि पक्ष सुनने के बाद खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और हजारीबाग के एसपी को पार्टी बनाते हुए जवाब तलब किया है.

इस दौरान खंडपीठ ने घटना पर गहरी चिंता और नाराजगी जताते हुए दोषियों पर अविलंब कार्रवाई करने को कहा है. खंडपीठ ने इसे जनहित याचिका में तब्दील करते हुए मामले को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में रेफर कर दिया है. आज इस मामले में हजारीबाग के एसपी वर्जुअली हाजिर हुए.

भाजपा ने हजारीबाग बंद का किया है आह्वान

दरअसल, 25 मार्च को 12 साल की नाबालिग का शव संदिग्ध अवस्था में मिला था. तब परिजनों ने बच्ची के साथ दुष्कर्म और साक्ष्य छिपाने के लिए नृशंस हत्या की बात की थी. इस घटना की चौतरफा निंदा हो रही है. 27 मार्च को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर इंसाफ दिलाने का भरोसा दिलाया था.

इस घटना के विरोध में भाजपा ने 30 मार्च को हजारीबाग बंद भी बुलाया है. भाजपा इस नृशंस घटना की निंदा करते हुए सरकार और प्रशासन को लगातार घेर रही है.

बता दें कि 29 मार्च को केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात करने गई थीं. उन्होंने झारखंड में बेटियों को असुरक्षित बताते हुए दोषियों को अविलंब गिरफ्तार करने की मांग की थी. इस घटना के विरोध में 29 मार्च को हजारीबाग में कैंडल मार्च भी निकाला गया था. धनबाद के लोगों ने भी बच्ची को श्रद्धांजलि देते हुए कैंडल मार्च निकाला था.

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