High Court Decision: पुलिस कांस्टेबल को 20 साल बाद मिला न्याय, कोर्ट ने रद्द की सख्त सजा; विभाग को दिए बहाली के आदेश

हरियाणा

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा पुलिस के एक कांस्टेबल को हरियाणा बड़ी राहत देते हुए उस पर 20 पंजाब और उच्च न्यायालय वर्ष पूर्व लगाई गई कठोर विभागीय सजा को रद कर दिया है।

अदालत ने न केवल पांच वेतनवृद्धियों की स्थायी रोक को अवैध ठहराया, बल्कि राज्य सरकार को मानसिक पीड़ा और आर्थिक नुकसान के लिए हर्जाना व एरियर ब्याज सहित देने के भी निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इस पूरे मामले को विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और सतही कार्रवाई का उदाहरण | बताया है। याचिकाकर्ता नरेश कुमार

वरिष्ठ अधिकारी के साथ झगड़े के कारण सरकार ने रोक दी थी पांच वेतन वृद्धि ने 3 अक्टूबर 1989 को हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के रूप में सेवा ज्वाइन की थी। वर्ष 2002-03 में उनकी तैनाती पुलिस पोस्ट कलानौर में थी। हेड कांस्टेबल जसवंत सिंह के साथ उनके संबंध बिगड़ गए। 11 अप्रैल 2003 को दोनों के बीच झगड़ा हुआ, जिसमें नरेश कुमार की आंख में गंभीर चोट आई और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा। नरेश कुमार पर वरिष्ठ अधिकारी से दुव्यवहार करने और ट्रांसफर के बावजूद वजूद सरकारी मोटरसाइकिल थाने से ले जाने जैसे आरोप लगाए

गए। इन आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। विभागीय जांच में जांच अधिकारी ने पाया कि सरकारी मोटरसाइकिल रिकार्ड और लाग बुक के अनुसार थाने में ही मौजूद थी और उसे ले ले जाने का आरोप सही नहीं है। मेडिकल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह भी स्पष्ट हुआ कि झगड़े में चोट नरेश कुमार को लगी थी। जांच अधिकारी ने यहां तक कहा कि मोटरसाइकिल ले जाने की शिकायत हेड कांस्टेबल द्वारा खुद को बचाने के लिए दर्ज कराई गई प्रतीत होती है। इन तथ्यों के आधार पर जांच अधिकारी ने नरेश कुमार को दोनों मुख्य आरोपों में निर्दोष बताया और उलटे हेड कांस्टेबल की भूमिका पर सवाल उठाए।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry