कोरबा: छत्तीसगढ़ का सबसे ऊंचा ‘मिनीमाता बांगो बांध’ इस साल समय से पहले ही भरने लगा है। वर्तमान में बांध में 56 फीसदी जलभराव हो चुका है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है, तो बांध के गेट खोलने पड़ सकते हैं, जिससे हसदेव नदी के तटीय गांवों और बस्तियों पर बाढ़ का बड़ा संकट मंडरा रहा है।
🏚️ अवैध अतिक्रमण और प्रशासन की सुस्ती
सबसे बड़ी चिंता का विषय नदी के किनारे बसे अवैध मकान हैं। सीतामणी जैसे क्षेत्रों में लोगों ने ईंट, सीमेंट और एस्बेस्टस शीट से अस्थाई ढांचों का निर्माण कर लिया है। हर साल बाढ़ की स्थिति बनने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया जाता। प्रशासन के लिए बाढ़ के बाद बचाव कार्य और मुआवजा वितरण का बोझ बढ़ जाता है, जबकि समय रहते अतिक्रमण हटाना स्थायी समाधान हो सकता है।
⚠️ इन इलाकों में बाढ़ का सर्वाधिक प्रभाव
बांध के गेट खुलने की स्थिति में कोरबा और जांजगीर-चांपा जिलों के निम्नलिखित गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं:
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कोरबा: चारपारा, खैरभवना, बरमपर, भलपहरी, जोगीपाली, कोहड़िया, राताखार, गेवराघाट, सीतामणी, ईमलीडूग्गू, कुदुरमाल, बरीडीह, कटबितला, मोहरा, झींका, ठिठोली, चिचौली।
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जांजगीर-चांपा: चांपा और देवरी गांव।
📊 बांध की जल भंडारण क्षमता
मिनीमाता बांगो बांध की कुल क्षमता 358.10 मीटर है। जल प्रबंधन के नियमानुसार, सुरक्षा और सिंचाई आवश्यकताओं को देखते हुए बांध में 85 से 90 फीसदी तक जल स्तर मेनटेन किया जाता है। फिलहाल बांध में खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी जमा हो चुका है। यदि जलस्तर सुरक्षित सीमा (85-90%) से ऊपर जाता है, तो अतिरिक्त पानी को नदी में प्रवाहित करना प्रशासन की मजबूरी होगी।
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