Haryana Wheat Procurement: हरियाणा में गेहूं खरीद का अंतिम दिन, अब तक 84 लाख मीट्रिक टन की आवक

हरियाणा

चंडीगढ़: प्रदेश में गेहूं की खरीद शुक्रवार तक होगी। अभी तक मंडियों में किसान 84.53 लाख मीट्रिक टन गेहूं पहुंचा चुके हैं। कुल आवक में से 84.16 लाख मीट्रिक टन यानी 99.6 प्रतिशत गेहूं की बोली हो चुकी है। मंडियों में अब नाममात्र के किसान ही अपनी फसल लेकर पहुंच रहे हैं, इसलिए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब खरीद की तिथि आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।

🚚 उठान की सुस्त रफ्तार: 95.7% कार्य पूरा, लेकिन कई जिलों में काम अभी शेष

उठान की प्रक्रिया अभी भी जारी है और अब तक 95.7 प्रतिशत गेहूं का उठान हो चुका है। कुल 80.69 लाख मीट्रिक टन खरीदी गई फसल में से 77.24 लाख मीट्रिक टन गेहूं गोदामों तक पहुँचाया जा चुका है। हालांकि, फतेहाबाद, जींद, रोहतक, सिरसा और सोनीपत जैसे जिलों में उठान का कार्य अभी भी शेष है। सिरसा जिला आवक के मामले में शीर्ष पर रहा है, जहाँ सर्वाधिक 11.01 लाख मीट्रिक टन गेहूं पहुंचा।

💰 करोड़ों का भुगतान अटका: उठान और मंजूरी लंबित होने से किसान परेशान

उठान की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण अभी भी किसानों का 1568.61 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, कुल 19465.93 करोड़ रुपये की राशि में से 17896.39 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है। भुगतान न होने के दो मुख्य कारण हैं: उठान प्रक्रिया के चलते 1323.45 करोड़ रुपये और मंजूरी लंबित होने के कारण 245.16 करोड़ रुपये की राशि रुकी हुई है। किसान अपनी मेहनत की कमाई का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

🛑 तिथि न बढ़ाने का निर्णय: बाहरी राज्यों से आवक रोकने के लिए प्रशासन सख्त

प्रशासन का मानना है कि यदि गेहूं खरीद की तिथि बढ़ाई जाती है, तो बाहरी राज्यों से गेहूं आने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे स्थानीय व्यवस्था प्रभावित होगी। वहीं, सरसों की खरीद को लेकर सरकार का रुख अलग है। सरसों की खरीद की तिथि बढ़ाने का उद्देश्य यह है कि यदि कोई भी स्थानीय किसान सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी फसल बेचना चाहता है, तो उसे पूरा मौका मिले।

📊 खरीद के मुख्य आंकड़े: 1 अप्रैल से अब तक का सफर

एक अप्रैल से शुरू हुई इस खरीद प्रक्रिया में प्रदेश के लगभग 9.27 लाख किसानों ने हिस्सा लिया। इन किसानों से कुल 80.69 लाख मीट्रिक टन गेहूं की सरकारी खरीद की जा चुकी है। अब सरकार का पूरा ध्यान लंबित भुगतान को जल्द से जल्द निपटाने और मंडियों से बचे हुए स्टॉक को गोदामों तक सुरक्षित पहुँचाने पर है।

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