चंडीगढ़: हरियाणा सरकार द्वारा बजट सत्र के दौरान राज्य के कर्मचारियों और पेंशनरों के आश्रितों के लिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) की सीमा को 3,500 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये प्रति माह करने का जो बड़ा ऐलान किया गया था, वह आज केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है। सरकार की इस सुस्ती का खामियाजा उन परिवारों को भुगतना पड़ रहा है जिन्हें इलाज के दौरान बढ़े हुए खर्च की दरकार है। घोषणा के महीनों बीत जाने के बाद भी सरकार द्वारा इसकी आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी नहीं की गई है।
📉 पुराने नियमों की मार: विभागों द्वारा खारिज किए जा रहे दावे
अधिसूचना न होने के कारण सरकारी विभागों में स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। लेखा शाखाएं और संबंधित विभाग आज भी पुराने नियमों का हवाला देकर कर्मचारियों के 9,000 रुपये तक के मेडिकल दावों को सीधे खारिज कर रहे हैं या उन्हें 3,500 रुपये की पुरानी सीमा पर ही सीमित कर रहे हैं। इससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है, क्योंकि वे इलाज के लिए अपनी जेब से मोटा पैसा खर्च करने को मजबूर हैं।
📢 कर्मचारी संघ की चेतावनी: तुरंत अधिसूचना जारी करे सरकार
हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन के राज्य प्रधान सतपाल सिंधु ने सरकार की इस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री और बजट सत्र में किए गए वादे की गरिमा तब तक नहीं बनी रहती, जब तक वह धरातल पर न उतरे। उन्होंने सरकार से मांग की है कि कर्मचारियों के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को तुरंत रोका जाए और बिना किसी और देरी के मेडिकल प्रतिपूर्ति की बढ़ी हुई सीमा का नोटिफिकेशन जारी किया जाए ताकि हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिल सके।
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