ग्वालियर: शहर और आसपास के जिलों में अब लाइसेंसी हथियार केवल सुरक्षा का साधन नहीं, बल्कि परिवारों के बीच विवाद की बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। कई घरों में मुखिया या पिता की मृत्यु के बाद बंदूक और उसके लाइसेंस पर कब्जा जमाने के लिए भाइयों के बीच खींचतान बढ़ गई है। स्थिति यह है कि एक भाई हथियार छोड़ने को तैयार नहीं है, तो दूसरा अपने हिस्से के कानूनी अधिकार की मांग कर रहा है। इस विवाद के कारण वर्षों से न तो लाइसेंस ट्रांसफर हो पा रहे हैं और न ही हथियार कानूनन जमा कराए जा रहे हैं।
⚖️ हर हफ्ते बढ़ रहे मामले, प्रशासन मौन
ग्वालियर जिले में वर्तमान में लगभग 31 हजार लाइसेंसी हथियार पंजीकृत हैं। इनमें से हर हफ्ते औसतन तीन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहाँ परिवार के सदस्य हथियार जब्त कराने, उन्हें सुरक्षित जमा कराने या किसी एक व्यक्ति के अवैध कब्जे को हटाने की मांग को लेकर पुलिस और प्रशासन के दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। हालांकि, इन शिकायतों के बावजूद जमीनी स्तर पर कार्रवाई की गति काफी धीमी है, जिससे विवाद सुलझने के बजाय और गहराते जा रहे हैं।
🚨 कानूनी पेचीदगियां और सुरक्षा का खतरा
बिना किसी स्पष्ट बंटवारे या कानूनी प्रक्रिया के, हथियारों का इस तरह पारिवारिक संपत्ति की तरह उपयोग करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य के लिए सुरक्षा के लिहाज से भी एक गंभीर खतरा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इन मामलों को गंभीरता से ले रहे हैं, लेकिन पारिवारिक कलह होने के कारण कई बार कार्रवाई में देरी होती है। हथियार धारकों को यह समझना आवश्यक है कि लाइसेंस ट्रांसफर की प्रक्रिया को अनदेखा करना न केवल पारिवारिक विवाद बढ़ाता है, बल्कि यह कानूनी रूप से भी अपराध की श्रेणी में आता है।
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