ग्वालियर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक लापता युवती और उसके साथ लापता युवक की खोजबीन के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) को निर्देशित किया है कि वह उक्त दोनों व्यक्तियों के आधार कार्ड के उपयोग से जुड़ी सीमित जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराए, ताकि उनके वर्तमान ठिकाने का पता लगाया जा सके।
📂 गोपनीयता और पुलिस की जिम्मेदारी
सुनवाई के दौरान UIDAI ने गोपनीयता (Privacy) का तर्क देते हुए जानकारी साझा करने में असमर्थता जताई थी। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि दोनों व्यक्ति लापता हैं, इसलिए उन्हें सुनवाई का अवसर देना व्यावहारिक नहीं है। साथ ही, हाईकोर्ट ने कड़े निर्देश दिए हैं कि:
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जानकारी केवल एसएसपी या एसआईटी प्रमुख तक ही सीमित रहेगी।
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डेटा किसी भी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं किया जाएगा।
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जानकारी लीक होने या दुरुपयोग होने की स्थिति में संबंधित पुलिस अधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे।
🔍 जांच में मिलेगी बड़ी मदद
याचिकाकर्ता शैलेन्द्र कुमार उपाध्याय की ओर से पैरवी के दौरान पुलिस ने बताया कि लापता युवती और युवक आशीष शर्मा की तलाश के लिए आधार का उपयोग कब और कहां हुआ, यह जानना महत्वपूर्ण है। इस जानकारी से जांच एजेंसी को उनके मूवमेंट को ट्रैक करने में काफी मदद मिलेगी। कोर्ट ने UIDAI को चार दिनों के भीतर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
🗓️ मामले की अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 3 जुलाई 2026 के लिए निर्धारित की है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पुलिस को उस तारीख तक केस डायरी तैयार रखनी होगी और लापता युवती को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। यह आदेश लापता लोगों की तलाश के लिए कानूनी प्रक्रिया और डेटा गोपनीयता के बीच एक महत्वपूर्ण संतुलन स्थापित करता है।
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