एसिड रिफ्लक्स यानी एसिडिटी के बोझ को आम मानकर ज्यादातर लोग झेलते रहते हैं. कभी सोडा ड्रिंक तो कभी गैस्ट्रिक रिलीफ वाली गोली ले लेने से कुछ देर के लिए राहत मिल जाती है. लेकिन ये प्रॉब्लम एक बार किसी के शरीर में बस जाए तो इसे खत्म करना आसान नहीं है. ड्रिंक्स, घरेलू नुस्खे या दवा से इसका इलाज करने के बजाय असली परेशानी से छुटकारा पाना चाहिए. यहां हम आंतों में जमने वाली गंदगी या बिगड़ी हुई गट हेल्थ की बात कर रहे हैं. भारत में अधिकतर लोगों को बिगड़ी हुई गट हेल्थ का सामना करना पड़ता है.
लोग इसे हल्के में लेते हैं लेकिन ये हमारे अंगों को धीरे-धीरे डैमेज करती है. सीनियर डाइटिशियन गीतिका चोपड़ा ने टीवी9 से खास बातचीत में बताया कि कैसे आंतों को हेल्दी बनाया जा सकता है. चलिए आपको बताते हैं…
गट हेल्थ का बिगड़ना
हमारे शरीर में गुड और बैड, दोनों तरह के बैक्टीरिया पाए जाते हैं. आंतों की बात करें तो इसमें करीब 100 ट्रिलियन से ज्यादा बैक्टीरिया है और इनके ग्रुप को माइक्रोबायोम पुकारा जाता है. अगर इंटेस्टाइन में इनका बैलेंस बिगड़ जाए तो इस प्रॉब्लम को डिस्बायोसिस (Dysbiosis) कहते हैं. ऐसे में गट हेल्थ बिगड़ने लगती है और इसका अहम कारण हमारा खानपान है. अगर जंक और प्रोसेस्ड फूड को लगातार खाया जाए तो ये प्रॉब्लम बढ़ने लगती है. इसके अलावा बार-बार एंटीबायोटिक यूज भी गट हेल्थ पर बुरा असर डालता है. कब्ज, एसिडिटी, गैस और ब्लोटिंग के अलावा स्किन प्रॉब्लम्स भी गट हेल्थ के बिगड़ने का संकेत है.
गट हेल्थ से होने वाली बीमारी
इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम
टाइप-2 डायबिटीज
ओबेसिटी यानी मोटापा
डिप्रेशन
आंतों की सफाई पर एक्सपर्ट ने क्या कहा?
सीनियर डाइटिशियन गीतिका चोपड़ा कहती हैं कि अगर किसी को कब्ज की प्रॉब्लम है तो ये आंतों में गंदगी के जमने का संकेत है. कब्ज से ब्लोटिंग, एसिडिटी या दूसरी एसिड रिफ्लक्स से जुड़ी प्रॉब्लम्स होंगी. आंतों में दिक्कत को गट इंफ्लामेशन भी पुकारा जाता है. इंफ्लामेशन क्यों हो रही है क्योंकि आप बॉडी में से कचरा ही नहीं निकाल रहे हैं या शरीर को डिटॉक्स नहीं कर रहे हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक शरीर दो तरह से काम करता है या तो वो डाइजेशन पर फोकस करेगा और फिर अपनी सफाई करता है. अगर आप दिनभर खाते रहेंगे तो बॉडी में डाइजेशन का प्रोसेस चलता रहेगा और डिटॉक्सिफिकेशन में प्रॉब्लम आएगी.
एक्सपर्ट ने आगे कहा, जब आप शरीर को क्लीन करने का वक्त देते हैं तो आंतें क्लियर हो पाती हैं या टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं. इसलिए इंटरमिटेंट फास्टिंग करते हैं तो आंतों की सफाई हो पाती है. इसका फायदा दूसरे अंगों को मिलता है क्योंकि ऐसा करने से ये अंग ठीक से काम कर पाते हैं.़
अपनाएं ये छोटा सा नियम
डॉ. गीतिका के मुताबिक आंतों को ठीक रखने के लिए खानपान कैसा रखना चाहिए, इस पर फोकस रखें. शरीर पर डबल लोड या प्रेशर डालने के बजाय हर चीज का टाइम सेट करें. दिन में इंटरमिटेंट फास्टिंग नहीं करनी है तो रात में 8 से सुबह 8 की फास्टिंग करें. इस तरह आप 12 घंटे शरीर को खानपान से आराम दे पाएंगे. मेटाबॉलिज्म बूस्ट होगा तो वेट मैनेजमेंट में भी हेल्प मिलेगी.
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