चंडीगढ़: अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस के अवसर पर चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने नशे के खिलाफ एक तीखा और स्पष्ट संदेश दिया। नगर निगम के विशेष सदन में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पुलिस व्यवस्था और प्रशासन की जवाबदेही तय करते हुए कहा कि नशे का कारोबार बिना किसी संरक्षण के चल ही नहीं सकता। इस दौरान डीआईजी और एसपी जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
👥 नशे के खिलाफ ‘जनआंदोलन’ की जरूरत
प्रशासक ने स्पष्ट किया कि केवल सरकार या पुलिस के भरोसे नशा मुक्त समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने पार्षदों से आह्वान किया कि वे अपने वार्डों में सक्रिय प्रहरी बनें और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें। उन्होंने कहा, “हर कोई चाहता है कि शहीद भगत सिंह पड़ोसी के घर में पैदा हों, लेकिन समाज सुधार के लिए हमें स्वयं जिम्मेदारी उठानी होगी।”
🤱 माताओं की पीड़ा और परिवारों का दर्द
कटारिया ने सीमावर्ती जिलों के अपने दौरों को याद करते हुए भावुक होकर कहा कि वहां की माताओं की केवल एक ही गुहार है—’हमारे बच्चों को नशे से बचा लीजिए।’ उन्होंने एक मां की आपबीती साझा की, जिसका बेटा नशे की खातिर घर का सामान तक बेच देता है। उन्होंने कहा कि यह पीड़ा केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की वास्तविकता है जो सिंथेटिक ड्रग्स और इंजेक्शन की भेंट चढ़ रहे हैं।
🛠️ नशा मुक्ति केंद्रों की नई भूमिका
प्रशासक ने दवा विक्रेताओं और स्वास्थ्य संस्थानों को चेतावनी दी कि वे अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाएं। उन्होंने नशा मुक्ति केंद्रों के लिए भी एक नई दिशा तय की है; उनका कहना है कि ये केंद्र केवल इलाज तक सीमित न रहें, बल्कि वहां से निकलने वाले युवाओं को कौशल विकास और रोजगार से जोड़ा जाए ताकि वे दोबारा नशे की ओर न लौटें।
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