Fuel Price Hike: पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतों में फिर भारी इजाफा; जानें दिल्ली, नोएडा समेत अपने शहर के नए दाम

व्यापार

नई दिल्ली: देश में आम आदमी को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। पेट्रोल और डीजल के दामों में एक बार फिर से इजाफा दर्ज किया गया है। पिछले महज पांच दिनों के भीतर यह दूसरी बार है जब ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। इस नए बदलाव के तहत पेट्रोल में 86 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 83 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। अगर पिछले पांच दिनों का कुल आंकड़ा देखें, तो दोनों ईंधनों के दाम करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं। इससे पहले 15 मई को भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल आया था, जब दोनों ही ईंधनों के दाम में एकमुश्त तीन रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था।

📊 देश की राजधानी दिल्ली में नए रेट लागू: पेट्रोल ₹98.64 और डीजल ₹91.58 प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

इस नई और ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब 98.64 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गई है, जबकि डीजल का भाव बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गया है। आपको बता दें कि इस नई बढ़ोतरी से पहले तक दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये प्रति लीटर थी, जबकि डीजल की कीमत 90.67 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बनी हुई थी। दिल्ली के अलावा मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में भी टैक्स और लोकल वैट (VAT) के चलते कीमतें इस आंकड़े से काफी ऊपर निकल चुकी हैं।

🚙 सीएनजी (CNG) की कीमतों में भी 1 रुपये की वृद्धि: दिल्ली में पहली बार ₹80 के पार पहुंची प्रति किलो कीमत

पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ पर्यावरण अनुकूल ईंधन सीएनजी (CNG) का इस्तेमाल करने वालों को भी झटका लगा है। दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में सीएनजी के दाम में 1 रुपया प्रति किलोग्राम का इजाफा कर दिया गया है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली के इतिहास में सीएनजी की कीमत पहली बार 80 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई है। इससे पहले 15 मई को भी सीएनजी के दाम में 2 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। इन बैक-टू-बैक वृद्धियों के बाद अब दिल्ली में सीएनजी के दाम 80.09 रुपये प्रति किलो, जबकि उत्तर प्रदेश के नोएडा में सीएनजी की कीमतें 88.70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं।

💼 नौकरीपेशा और कमर्शियल वाहन चालकों पर सीधा असर: ईरान जंग के चलते कच्चे तेल में 50% से ज्यादा का उबाल

ईंधन के दामों में हो रही इस लगातार बढ़ोतरी के कारण रोजाना अपने वाहनों से सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, ऑटो, ई-रिक्शा और ऐप-बेस्ड कैब (Ola-Uber) चालकों के दैनिक बजट पर सीधा और गहरा असर पड़ेगा। इस वैश्विक महंगाई की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव है। जब से ईरान जंग की शुरुआत हुई है, तब से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम में 50 फीसदी से ज्यादा का भारी इजाफा देखने को मिल चुका है। पिछले कुछ दिनों से लगातार कच्चे तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने हुए हैं।

📉 शेयर बाजार बेहाल और रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: आयात लागत बढ़ने से देश पर बढ़ेगा वित्तीय दबाव

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतों के चलते भारतीय शेयर बाजार और मुद्रा बाजार का हाल बेहाल है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर होते हुए 96.23 के अपने अब तक के सबसे नए और रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इस दोहरी मार के कारण आने वाले दिनों में आम आदमी की जेब पर अन्य जरूरी चीजों की महंगाई का बोझ भी बढ़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत जैसे अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 80% से अधिक आयात पर निर्भर देश पर सीधा नकारात्मक असर पड़ता है, क्योंकि सरकार को तेल खरीदने के लिए ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। अगर रुपया और कमजोर होता है, तो कच्चे तेल के आयात की लागत तेजी से बढ़ेगी, जिससे देश का चालू खाता घाटा (CAD) भी बढ़ सकता है।

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