मिसाइल से लेकर माइंडसेट तक… सेना प्रमुख ने समझाया क्या है ‘शौर्य संप्रवाह’, दुश्मनों के लिए बजाई खतरे की घंटी

देश

जब भी देश ने पुकारा, हमारे पूर्व सैनिक हर परिस्थिति में देश के साथ खड़े दिखाई दिए… सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ये बात बुधवार (14 जनवरी) को जयपुर में सशस्त्र सेना पूर्व सैनिक दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कही. उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों ने सक्रिय सेवा के बाद भी भारत की सुरक्षा, शासन, उद्योग और सामाजिक विकास में अहम योगदान दिया है.

दरअसल सशस्त्र सेना पूर्व सैनिक दिवस हर साल 14 जनवरी को सशस्त्र बलों के पहले कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल केएम करियप्पा की उल्लेखनीय सेवाओं की याद में मनाया जाता है. करियप्पा 1953 में इसी दिन (14 जनवरी) रिटायर हुए थे. उन्होंने देश के लिए अहम योगदान दिया, जिन्हें आज भी याद किया जाता है.

‘पूर्व सैनिकों कोशामिल कर रहे हैं’

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना अपने पूर्व सैनिकों को देश के सुरक्षा ढांचे और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल कर रही है. उन्होंने कहा कि पिछले साल से ही हम सक्रिय रूप से शौर्य संप्रवाह के जरिए से पूर्व सैनिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचों में भी शामिल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सेना पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए कल्याण, स्वास्थ्य सेवा और पुनर्वास योजनाओं का विस्तार कर रही है.

‘देश की सुरक्षा में अहम योगदान’

सेना प्रमुख ने कहा कि पूर्व सैनिकों ने सक्रिय सेवा के बाद भी भारत की सुरक्षा, शासन, उद्योग और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उन्होंने कहा कि जब भी देश ने पुकारा, हमारे पूर्व सैनिक हर परिस्थिति में देश के साथ खड़े दिखाई दिए. यह आपके भीतर बसे राष्ट्रधर्म और कर्तव्यबोध का प्रमाण है.उन्होंने कहा कि आज जब देश विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है, तब आपके अनुभव, ईमानदारी और राष्ट्रीय सोच का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है.

प्रोजेक्ट नमन शुरू किया गया

जनरल द्विवेदी ने सेना के बढ़ते कल्याणकारी इकोसिस्टम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय सेना पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवार के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि इसी संकल्प के साथ 30 अगस्त 2024 को प्रोजेक्ट नमन शुरू किया गया था. उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद रक्षा पेंशन भोगियों और उनके परिवार को एक समर्पित भरोसेमंद और आसानी से उपलब्ध सहायता प्रणाली प्रदान करना है.

करीब 200 नमन केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य

सेना प्रमुख ने कहा कि इस सेना दिवस के अवसर पर 100वें नमन केंद्र का उद्घाटन किया जा रहा है और जनवरी 2027 तक करीब 200 नमन केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसमें दूरदराज के स्थान भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि सेना अपने कर्मियों, पूर्व सैनिकों और परिवारों को एक बड़ी इकाई के रूप में देखती है.

पुनर्वास एवं रोजगार के प्रयासों पर जोर

जनरल द्विवेदी ने सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और आश्रितों का जिक्र करते हुए कहा, ‘मैं सशस्त्र बलों को लगभग 1.25 करोड़ सदस्यों वाला एक मजबूत परिवार मानता हूं’. उन्होंने रणनीतिक योजना में पूर्व सैनिकों के बढ़ते योगदान पर जोर देते हुए कहा कि शौर्य संप्रवाह जैसी योजनाओं के जरिए से पूर्व सैनिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचों में भी एकीकृत किया जा रहा है. उन्होंने पुनर्वास एवं रोजगार के प्रयासों पर भी जोर दिया और कहा कि सेवानिवृत्त के बाद सैनिकों के आत्मनिर्भर जीवन और समाज में योगदान के लिए रिसेटलमेंट और स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देना बहुत जरूरी है.

सेना प्रमुख ने बताया कि इस साल अकेले आर्मी वेलफेयर प्लेसमेंट ऑर्गनाइजेशन के जरिए 17,000 से ज्यादा पूर्व सैनिकों को रोजगार मिला है और कुल मिलाकर इस संगठन द्वारा डेढ़ लाख से ज्यादा पूर्व सैनिकों को रोजगार मुहैया कराया गया है. सेना प्रमुख ने पूर्व सैनिकों से समाज के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहने का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्र आपकी सेवा का सम्मान करता है और उम्मीद है कि आपके अनुभव, कौशल और समर्पण से भविष्य में भी देश को लाभ मिलेगा.

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