गिरिडीह में एक बार फिर निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। ‘राधास्वामी’ नामक संगठन पर आरोप है कि उसने वाहन से लेकर शिक्षा तक के आकर्षक ऑफर देकर लोगों से मोटी रकम वसूली और अब अपने वादे से मुकर गया है। संगठन द्वारा ईएमआई (EMI) के भुगतान में की जा रही देरी या पूरी तरह बंद होने के कारण सैकड़ों लोग आर्थिक संकट और मानसिक पीड़ा झेल रहे हैं।
🔍 कैसे फंसाया गया जाल में?
संगठन ने लोगों को 60/40 या 70/30 के ऑफर दिए थे, जिसके तहत 30-40% भुगतान करने पर पूरी गाड़ी देने का वादा किया गया था। संगठन ने लोगों के नाम पर फाइनेंस करवाया और खुद ईएमआई भरने का वादा किया। शुरुआती 3-4 महीने किस्तें जमा भी की गईं, जिससे लोगों का भरोसा जम गया। लेकिन हाल के महीनों में किस्तें आनी बंद हो गईं, जिससे लोगों पर फाइनेंस कंपनियों का दबाव बढ़ गया है।
🔒 दफ्तर पर लटके ताले और लाभुकों का आक्रोश
सोमवार को गिरिडीह के बनखंजो स्थित कार्यालय पर सैकड़ों लाभुक अपनी शिकायत लेकर पहुंचे, लेकिन वहां कार्यालय का शटर बंद मिला और कोई भी जिम्मेदार पदाधिकारी मौजूद नहीं था। बगोदर की रेखा देवी और डुमरी के सत्यनारायण जैसे कई लाभुक, जिन्होंने कर्ज लेकर पैसा जमा किया था, अब पाई-पाई को मोहताज हो गए हैं। फाइनेंस कंपनियां उन पर रिकवरी का दबाव बना रही हैं, जिससे परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं।
💬 क्या है संगठन का पक्ष?
इस मामले पर संगठन की जिला प्रभारी अनिशा सिन्हा का कहना है कि जिले में 5 हजार से अधिक लोगों ने योजना का लाभ लिया है। कुछ तकनीकी कारणों और ईएमआई को लेकर समस्या आ रही है। उन्होंने दावा किया कि संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी भुगतान शुरू करने के प्रयास में जुटे हैं और जल्द ही अड़चनें दूर कर ली जाएंगी।
संपादकीय टिप्पणी: इस तरह के लुभावने निवेश ऑफर अक्सर असुरक्षित होते हैं। क्या आपको लगता है कि प्रशासन को ऐसे संगठनों की सक्रियता पर समय-समय पर ‘पब्लिक एडवाइजरी’ जारी करनी चाहिए ताकि गरीब लोग अपनी मेहनत की कमाई न गंवाएं? अपने विचार नीचे साझा करें।
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