उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बकेवर क्षेत्र में हुई विजय निषाद की हत्या ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस की जांच में जो खुलासा हुआ, वह किसी फिल्म की पटकथा से भी अधिक डरावना है। एक विवाहित महिला ने अपने पति के साथ मिलकर अपने प्रेमी की न केवल हत्या की, बल्कि साक्ष्य मिटाने के लिए शव को आरी और ग्राइंडर से काटकर ठिकाने लगा दिया। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस पति-पत्नी की जोड़ी को गिरफ्तार कर लिया है।
🖤 क्या थी हत्या की असली वजह?
पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि मृतक विजय निषाद का एक विवाहित महिला से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। महिला का आरोप है कि विजय उसे लगातार परेशान कर रहा था और उसके निजी फोटो व वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दे रहा था। इस ब्लैकमेलिंग से तंग आकर महिला ने अपने पति के साथ मिलकर विजय को रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रचा।
🔎 गूगल पर सर्च की ‘फांसी और जेल’ की जानकारी
इस हत्याकांड का सबसे चौंकाने वाला पहलू आरोपियों द्वारा की गई इंटरनेट सर्च है। मुख्य आरोपी पति कामता निषाद ने हत्या से पहले गूगल और यूट्यूब पर अपराध जगत से जुड़ी तमाम जानकारियां जुटाई थीं। उसने ‘जेल कैसी होती है?’, ‘फांसी कब मिलती है?’ और ‘फांसी से पहले काला कपड़ा क्यों पहनाते हैं?’ जैसे सवाल सर्च किए थे। इससे साफ है कि आरोपी कानून के शिकंजे और सजा की गंभीरता से भली-भांति परिचित थे।
🚨 क्रूरता का अंत: सलाखों के पीछे पहुंचे आरोपी
हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने शव को कई टुकड़ों में काटकर अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया था। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल डेटा और कड़ी पूछताछ के माध्यम से इस पूरी साजिश को बेनकाब किया। आरोपी पति-पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इस वारदात की क्रूरता ने पूरे फतेहपुर जिले में हड़कंप मचा दिया है और लोग आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग कर रहे हैं।
संपादकीय टिप्पणी: इंटरनेट का उपयोग अपराध की योजना बनाने के लिए किया जाना चिंताजनक है। क्या आपको लगता है कि अपराध से जुड़ी जानकारी पर भी साइबर निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए ताकि ऐसी आपराधिक मानसिकता को शुरुआत में ही रोका जा सके? अपने विचार नीचे साझा करें।
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