कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की निगाहें अब दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट के चुनावी नतीजों पर टिक गई हैं। ज्ञात हो कि बीते 29 अप्रैल को फलता में हुए मतदान के दौरान व्यापक धांधली और गड़बड़ी के संगीन आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने वहां की वोटिंग को पूरी तरह रद्द कर दिया था। इसके बाद, 21 मई को फलता के सभी 285 पोलिंग स्टेशनों पर कड़े सुरक्षा घेरे के बीच दोबारा मतदान कराया गया, जिसमें जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और रिकॉर्ड 87 प्रतिशत भारी वोटिंग दर्ज हुई। आज (रविवार) इस बेहद चर्चित सीट पर मतों की गिनती यानी मतगणना होने जा रही है। आज के रिजल्ट से यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि क्या बीजेपी बंगाल में अपनी जीत का सिलसिला जारी रखेगी या फिर कांग्रेस यहाँ कोई नया सियासी कमाल दिखाएगी।
इस दिलचस्प चुनावी रण में बीजेपी के देबांग्शु पांडा, कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला, माकपा (CPIM) के शंभुनाथ कुर्मी सहित निर्दलीय प्रत्याशी दीप हाटी और चंद्रकांत राय अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि मतदान से ठीक पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधिकारिक उम्मीदवार जहांगीर खान अचानक चुनावी मैदान से पीछे हट गये थे। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के कारण टीएमसी इस बार फलता के चुनावी मैदान में कहीं भी मौजूद नहीं है।
बीजेपी खेमा इन नतीजों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त और चिंतामुक्त नजर आ रहा है। पार्टी के स्थानीय कद्दावर नेताओं का कहना है कि हमारी जीत तो तय है, अब बस यह देखना बाकी है कि जीत का अंतर कितना बड़ा होता है। एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने पूर्व के चुनावी इतिहास का हवाला देते हुए कहा, “अभिषेक बनर्जी को पिछले लोकसभा चुनाव में इस इलाके से 1 लाख 68 हज़ार की भारी-भरकम बढ़त मिली थी। लेकिन इस बार केंद्रीय बलों की मौजूदगी में लोग बिना किसी डर के बड़ी संख्या में घरों से निकलकर वोट कर पाए हैं। ऐसे में उस समय के नतीजों के पीछे का असली खेल क्या था, यह आज आने वाले निष्पक्ष नतीजे पूरी तरह साफ कर देंगे।”
🗳️ फलता क्षेत्र में क्यों रद्द हुई थी वोटिंग? शुभेंदु अधिकारी की शिकायत और EVM पर स्याही-टेप मिलने के बाद आयोग का बड़ा एक्शन
राजनैतिक विश्लेषकों के अनुसार, विधानसभा चुनाव से पहले तक इस पूरे तटीय इलाके में टीएमसी का एकतरफा संगठनात्मक दबदबा माना जाता था, लेकिन अब विपक्षी दलों की सक्रियता के बाद बीजेपी के पास यहाँ पैर पसारने का खुला मैदान है। यदि आज फलता सीट पर कमल खिलता है और बीजेपी की जीत होती है, तो पश्चिम बंगाल विधानसभा में बीजेपी के कुल विधायकों की संख्या बढ़कर 208 के जादुई आंकड़े तक पहुंच जाएगी।
आपको बता दें कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने कई गंभीर और लिखित शिकायतों की स्क्रूटनी करने के बाद दक्षिण 24 परगना के पूरे फलता विधानसभा क्षेत्र की वोटिंग को शून्य घोषित करते हुए रद्द कर दिया था। राज्य के मुख्य विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण के दौरान 29 अप्रैल को आयोग को फलता के दर्जनों संवेदनशील बूथों पर तैनात इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर जानबूझकर काली स्याही फेंकने और विशिष्ट बटनों पर सेलोटेप लगाए जाने की प्रामाणिक शिकायतें मिली थीं। इस गड़बड़ी के सामने आते ही खुद बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने मोर्चा संभाला था और चुनाव आयोग से फलता में तुरंत केंद्रीय बलों की निगरानी में दोबारा निष्पक्ष चुनाव कराने की पुरजोर मांग उठाई थी।
❌ कभी गढ़ था टीएमसी का, आज दफ्तरों पर लटके ताले: ऐन वक्त पर रेस से बाहर हुए जहांगीर खान
शुभेंदु अधिकारी ने उस समय कड़े शब्दों में कहा था कि मतदान के दिन मिली धांधली की खबरों के बाद उन्हें यह बिल्कुल स्पष्ट लग गया था कि आयोग को लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस क्षेत्र में फिर से वोटिंग करवानी ही चाहिए। आखिरकार कमीशन ने उनकी मांग को जायज मानते हुए दोबारा चुनाव कराने का ऐतिहासिक फैसला किया। इसके उलट, 2 मई को टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तंज कसते हुए लिखा था, ‘दस जन्म भी मेरे डायमंड हार्बर मॉडल को नहीं दबा सकते। दिल्ली से जिसे चाहो, जितनी ताकत हो ले आओ, अगर दम है तो लड़ो और नतीजे देकर दिखाओ।’
लेकिन 4 मई को राज्य की अन्य 293 सीटों पर आए आधिकारिक चुनावी नतीजों के बाद फलता के जमीनी हालात पूरी तरह बदल गए। तृणमूल कांग्रेस इन नए चुनावी समीकरणों से लगभग पूरी तरह गायब देखी गई, जहाँ पहले विपक्ष को कथित तौर पर प्रचार करने की भी अनुमति नहीं थी, वहां अब दृश्य बदल चुका था। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब चुनाव से ठीक दो दिन पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने अचानक एक वीडियो जारी कर घोषणा कर दी कि वे अब इस चुनावी रेस का हिस्सा नहीं हैं। जहांगीर ने मुख्यमंत्री द्वारा फलता क्षेत्र के लिए घोषित किए गए विशेष विकास ‘पैकेज’ का स्वागत करते हुए मैदान छोड़ दिया। पुनर्मतदान के दिन उनके आलीशान घर का मुख्य दरवाजा पूरी तरह बंद देखा गया।
चुनाव के दौरान फलता में स्थित मुख्य तृणमूल कांग्रेस कार्यालय पर भी ताला लटका रहा। हालांकि जहांगीर खान खुद पूरे घटनाक्रम के दौरान जनता के बीच कहीं नजर नहीं आए, लेकिन गुरुवार, 21 मई को दोबारा हुए मतदान के दिन उनकी पत्नी रेजिना बीबी चेहरे पर मास्क लगाकर पोलिंग बूथ पर अपना वोट डालने जरूर पहुंचीं। ज्ञात हो कि जहांगीर दंपति बेलसिंह-2 ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले बूथ नंबर 190 के पंजीकृत वोटर हैं। उनके घर के ठीक सामने सेरामपुर प्राइमरी स्कूल का मुख्य पोलिंग स्टेशन बनाया गया था, लेकिन सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच वहां मौजूद स्थानीय ग्रामीणों और मीडियाकर्मियों में से किसी ने भी जहांगीर खान को वोट डालते या बाहर घूमते नहीं देखा। अब देखना होगा कि आज ईवीएम खुलने के बाद फलता की जनता किस करवट बैठती है।
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