कुरुक्षेत्र: कुरुक्षेत्र के कस्बे शाहाबाद में दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे-44 पर एक कार सड़क पर खड़े ट्रक के नीचे घुस गईं। इस दुखद दुर्मेंघटना में कार चला रहे बिजली निगम के क्लर्क की मौके पर मौत हो गई। क्लर्क के जीजा ने उसे बाहर निकालने की भरपूर कोशिश भी की लेकिन निकालने में कामयाब नहीं हो पाए। जिसके बाद हाइड्रा मशीन की मदद के साथ कार को बाहर खींचा गया।
मृतक की पहचान जितेद्र कुमार (28) निवासी दुखेड़ी जिला अंबाला के रूप में हुई। जितेद्र कुमार अंबाला में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम में कार्यरत थे। जितेंद्र के जीजा भी उनके पीछे अपनी कार में आ रहे थे। दोनों करनाल से अपनी-अपनी कार में अंबाला लौट रहे थे। रमित कुमार (30) निवासी जलबेड़ा जिला अंबाला ने बताया कि वह बिजली निगम में कार्य थे उनका साला जितेंद्र भी उनके साथ ही काम करता था वह 29 नवंबर को अपने साले जितेंद्र के साथ अपने किसी निजी काम से करनाल गए थे दोनों अपनी अपनी अपनी कार में घर लौट रहे थे।
बिना इंडिकेटर जगाए सड़क पर खड़ा था ट्रक
रमित कुमार ने बताया कि जितेंद्र अपनी कर को सही स्पीड में चला रहे थे वह जितेंद्र को अपनी कार से फॉलो कर रहे थे नेशनल हाईवे 44 पर धनतोड़ी गांव के पास सड़क के बीचों-बीच ट्रक संख्या R J -07 GD 9132 खड़ा था जिसके ड्राइवर ने ट्रक का कोई रिफ्लेक्टर ऑन नहीं किया हुआ था, पार्किंग साइन बोर्ड भी नहीं लगाया हुआ था और ना ही कोई लाइट ही जगा रखी थी। इस दौरान उसके साल की कार उस ट्रक के पिछले हिस्से में टकरा गई जबकि उसने खुद को बचाते हुए अपनी कार को बाई तरफ मोड़ लिया।
जितेंद्र ट्रक के नीचे फंसी हुई कार के बीच फंस गया। उन्होंने तुरंत अपनी कार रोक कर जितेंद्र को बाहर निकालने की भरसक कोशिश की, मगर कार की खिड़कियां नहीं खुली। दुर्घटना को देखते हुए राहगीरों ने तुरंत हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल किया और मौके पर पुलिस को बुलाया गया। इसके बाद पुलिस द्वारा हाइड्रा मशीन बुलाकर, मशीन के जरिए ट्रक के नीचे फंसी हुई कार को बाहर निकाला गया। जितेंद्र को कार के बाहर निकाल कर सिविल अस्पताल कुरुक्षेत्र पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस संबंध में रमित के बयान पर शाहबाद पुलिस ने ट्रक नंबर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है पुलिस ने सब का पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों के हवाले कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जितेंद्र के पिता ज्ञानचंद की भी पहले ही मृत्यु हो चुकी है जितेंद्र के सहारे ही उनके परिवार का गुजारा चल रहा था।
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