दुर्ग में स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली और बढ़ते बिजली बिलों के खिलाफ जनता का आक्रोश चरम पर है। बुधवार को बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय नागरिक स्मार्ट मीटर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और जमकर नारेबाजी की। विरोध इतना उग्र था कि प्रदर्शनकारियों ने स्मार्ट मीटरों को जमीन पर पटककर तोड़ दिया। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल प्रभाव से स्मार्ट मीटर हटाने और बिजली की बढ़ी दरों को वापस लेने की मांग की है।
💰 ‘बिजली के बिल ने बिगाड़ा घर का बजट’
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना है कि छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादक राज्य होने के बावजूद यहां की जनता को महंगी बिजली का सामना करना पड़ रहा है। पुष्पा नामक महिला ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि उनके पति गार्ड की नौकरी कर 10 हजार रुपये कमाते हैं, जबकि बिजली बिल 5 हजार रुपये आया है। इसी तरह ज्योति ने आरोप लगाया कि बिना एसी या फ्रिज के भी बिल कई गुना बढ़कर आ रहा है। मजदूरी करने वालों के घरों में भी 1400-1500 रुपये के बिल भेजे जा रहे हैं, जो उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा है।
🔍 स्मार्ट मीटर पर हेरफेर और जबरदस्ती का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मीटर लगाने वाले कर्मचारियों के पास अक्सर कोई अधिकृत पहचान पत्र नहीं होता और कनेक्शन काटने की धमकी देकर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। लोगों ने इलेक्ट्रॉनिक मीटरों की रीडिंग में गड़बड़ी और हेरफेर की भी आशंका जताई है। शिकायत लेकर बिजली दफ्तर जाने के बावजूद वहां सुनवाई न होने से जनता में प्रशासन के प्रति गहरा असंतोष है।
📢 उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की और बिजली दरों में राहत नहीं दी, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और अधिक उग्र होगा।
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