दुर्ग: अमेरिका और ईरान की चल रही होर्मुज में नाकेबंदी के चलते कच्चे तेल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। तेल की किल्लत के चलते बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो बार लोगों से तेल बचाने की अपील कर चुके हैं। केंद्र सरकार यह साफ कर चुकी है कि फिलहाल देश में तेल और गैस की किल्लत नहीं है, लेकिन लोगों को तेल की बचत करनी चाहिए ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहे और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सके।
🚩 वीआईपी कल्चर का त्याग: मंत्रियों के काफिले में हुई गाड़ियों की कटौती
पीएम मोदी की अपील का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई पड़ने लगा है। कई बीजेपी शासित राज्यों के मंत्री अपना काफिला कम कर चुके हैं। खुद पीएम मोदी और अमित शाह का काफिला भी पहले से छोटा हो गया है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और विधानसभा स्पीकर रमन सिंह भी अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या कम कर चुके हैं। सभी का एक ही मकसद है—जितना जरूरी हो, उतनी ही ईंधन की खपत करना।
🛺 सादगी की मिसाल: शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शुरू की ई-रिक्शा की सवारी
इसी कड़ी में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सादगी का परिचय देते हुए ई-रिक्शा की सवारी शुरू की है। मंत्री ने वीआईपी कल्चर छोड़ पीएम मोदी के तेल बचाने के अभियान को पूरी तरह अपनाया है। उन्होंने संदेश दिया है कि तेल बचाने के साथ-साथ इस अभियान से पर्यावरण संरक्षण को भी बड़ा फायदा मिलेगा। मंत्री अब अपने आधिकारिक दौरों और स्थानीय यात्राओं के लिए ई-रिक्शा का चुनाव कर रहे हैं।
🌱 पर्यावरण और अर्थव्यवस्था का संगम: मंत्री ने जनता से की खास अपील
मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा, “जितनी जरूरत हो उतना ही हमें गाड़ी का इस्तेमाल करना चाहिए। दिखावे के चक्कर में पड़कर तेल की बर्बादी करना ठीक नहीं है। ईंधन की बचत होगी तो इसका सीधा आर्थिक फायदा विदेशी मुद्रा बचाने में मिलेगा और प्रदूषण का स्तर भी कम होगा।” उन्होंने जनता से भी आह्वान किया है कि वे हर संभव स्तर पर डीजल और पेट्रोल बचाने की कोशिश करें ताकि आने वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित पर्यावरण मिल सके।
🇮🇳 विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा: फिजूलखर्ची रोकने पर सरकार का जोर
मंत्री ने स्पष्ट किया कि ईंधन की बचत केवल एक व्यक्तिगत बचत नहीं है, बल्कि यह देश के विकास में योगदान है। भारत कच्चे तेल के लिए आयात पर निर्भर है और डॉलर के रूप में भारी भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में लग्जरी गाड़ियों का मोह छोड़कर छोटे और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करना समय की मांग है। छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रियों द्वारा उठाए गए इन कदमों की सराहना की जा रही है, जिससे आम जनता के बीच भी सकारात्मक संदेश जा रहा है।
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