DSPMU Ranchi: विश्वविद्यालय का दर्जा तो मिला, पर बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे छात्र; जानें क्या है जमीनी हकीकत

झारखण्ड

रांची:डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU), रांची आज झारखंड के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है. पहले यह संस्थान रांची कॉलेज के नाम से जाना जाता था, जिसकी स्थापना वर्ष 1926 में हुई थी. लंबे समय तक रांची विश्वविद्यालय के अधीन संचालित होने के बाद 11 अप्रैल 2017 को इसे स्वतंत्र राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा मिला. तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति के बाद यह आधिकारिक रूप से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय बना.

विश्वविद्यालय बनने का उद्देश्य पूरा नहीं

विश्वविद्यालय में अपग्रेड करने के पीछे सरकार और शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य यह था कि झारखंड के आदिवासी, मूलवासी, स्थानीय और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल और आधुनिक सुविधाएं मिल सकें. रांची कॉलेज के समय से ही यहां बड़ी संख्या में जनजातीय और ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थी पढ़ाई करते रहे हैं. ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि विश्वविद्यालय बनने के बाद यहां शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

यूनिवर्सिटी में मूलभूत सुविधाएं नहीं

हालांकि, विश्वविद्यालय बनने के लगभग नौ वर्ष बाद भी छात्रों का आरोप है कि संस्थान की स्थिति में बहुत ज्यादा सुधार नहीं हुआ है. छात्रों का कहना है कि प्रशासनिक भवनों और कुछ कार्यालयों को जरूर आधुनिक रूप दिया गया है, लेकिन कैंपस की मूल समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं. विश्वविद्यालय परिसर में जगह-जगह गंदगी और कचरे का अंबार देखने को मिलता है. कई शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि वहां जाना मुश्किल हो गया है. छात्र-छात्राओं का कहना है कि पीने के स्वच्छ पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है. गर्मी के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है.

छात्राओं के लिए अलग से कॉमन रूम नहीं

वहीं छात्राओं के लिए अलग से बेहतर कॉमन रूम की व्यवस्था नहीं होने को लेकर भी नाराजगी है. छात्रों का आरोप है कि सुविधाओं में सुधार किए बिना लगातार फीस वृद्धि की जा रही है. हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा फीस बढ़ोतरी के निर्णय के बाद छात्रों में आक्रोश बढ़ गया है. विभिन्न छात्र संगठनों ने इसको लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है. छात्रों का कहना है कि जब विश्वविद्यालय में मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं, तब फीस बढ़ाना छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा है.

फीस वृद्धि को लेकर छात्रों में नाराजगी

कई छात्रों का कहना है कि DSPMU में बड़ी संख्या में गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं. ऐसे में फीस वृद्धि का सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ेगा. छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पहले सुविधाएं बहाल करने और उसके बाद ही किसी प्रकार की फीस बढ़ोतरी करने की मांग की है.

समस्याओं का होगा समाधानः कुलपति

मामले को लेकर जब कुलपति प्रोफेसर राजीव मनोहर से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्होंने हाल ही में पदभार ग्रहण किया है. विश्वविद्यालय की समस्याओं को गंभीरता से देखा और समझा जा रहा है. उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास तेज किए गए हैं और आने वाले समय में DSPMU को एक आदर्श विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा.हालांकि छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के आश्वासन अब तक जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि DSPMU प्रशासन छात्रों की समस्याओं का समाधान कितनी तेजी और गंभीरता से कर पाता है.

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