चंडीगढ़ः सरकारी मैडीकल कॉलेज एवं अस्पताल में अब डॉक्टर दवाइयां लिखते समय लापरवाही नहीं बरत पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट और नैशनल मैडीकल कमीशन (एन.एम.सी.) के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में संस्थान के डॉयरैक्टर प्रिंसिपल प्रो.जी.पी. धामी ने सभी डॉक्टरों को साफ-साफ आदेश जारी किए है।
निर्देशों के अनुसार अब डॉक्टरों को दवाइयां बड़े साफ अक्षरों में लिखनी होगी या कंप्यूटर से प्रिंट निकालकर देना होगा। यह कदम मुख्य रूप से मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है। अक्सर अस्पष्ट लिखावट के कारण मैडीकल स्टोर पर दवाइयां गलत पढ़ ली जाती है, जिससे मरीज की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। नई व्यवस्था से ऐसी गलतियों पर रोक लगेगी और इलाज की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व सुरक्षित होगी।
सभी विभागों में लागू
आदेशों के मुताबिक सभी विभागों के प्रमुखों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधीन काम करने वाले डॉक्टर तुरंत इस नियम का पालन करें। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कदम देर से सही, लेकिन बहुत ज़रूरी था। अक्सर मरीजों और उनके परिजनों को पर्ची पर लिखी दवाई समझ नहीं आती थी और मेडिकल स्टोर वाले भी अंदाज़े से दवाइयां दे देते थे। अब यह समस्या नहीं रहेगी। जीएमसीएच प्रशासन का मानना है कि इस आदेश से अस्पताल में इलाज की गुणवत्ता बेहतर होगी और मरीजों का विश्वास मज़बूत होगा। इस आदेश को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है और सभी डॉक्टरों के लिए इसका पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है।
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