बालोद: डौंडीलोहारा के शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई) में शिक्षकों और संस्था प्रमुख के बीच विवाद अब खुलकर सामने आ गया है. मामला वेतन कटौती, अवकाश, महिला शिक्षकों से अभद्रता और बच्चों से जबरन काम कराने जैसे आरोपों पर गरमा गया है. एक शिक्षक ने तो हताश होकर आत्महत्या जैसे कदम की बात कह डाली.
CR खराब करने की दे रहे धमकी: शिक्षकों का कहना है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने महीने के सभी शनिवार को अवकाश का आदेश दिया है, लेकिन संस्था प्रमुख ने आदेश को न मानते हुए उनका वेतन काट लिया. शिक्षक चंद्रकुमार देशमुख ने आरोप लगाया कि नियमों की अनदेखी कर दो शनिवार का वेतन काटा गया. शिकायत करने पर CR खराब करने की धमकी दी गई.
प्राचार्य ने बिना किसी स्पष्टीकरण के पेमेंट काटने का आदेश दिया और किसी भी शिकायत के लिए सीधे संचालक से सम्पर्क करने जैसी धमकी दी– शिक्षक गुलाब कुर्रे
बच्चों से कराया काम: 22 एकड़ के विशाल कैंपस की सफाई का काम बच्चों से कराए जाने का आरोप भी सामने आया है. शिक्षकों ने बताया कि यहां मेशन (राजमिस्त्री) ट्रेड नहीं है, फिर भी विद्यार्थियों से टॉयलेट निर्माण और भवन मरम्मत जैसे काम कराए जा रहे हैं. जिनके एवज में मजदूरी का बिल भी निकाला गया है. बताया गया कि बच्चों को घास कटाई और सफाई में भी लगाया गया, जिससे बिच्छू डंक जैसी घटनाएं हो चुकी हैं.
महिला शिक्षकों के गंभीर आरोप: महिला शिक्षक निर्मला गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि संस्था प्रमुख ने उन्हें आपत्तिजनक शब्द कहे. उन्होंने बताया कि बच्चे की तबीयत खराब होने पर छुट्टी मांगने पर प्राचार्य ने गलत कमेंट भी किया और कहा कि बच्चा मेरे लिए पैदा किए हो क्या?
देरी से पहुंचने पर प्राचार्य ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति हुई है, मुफ्त की नौकरी मिली है, कुछ करना नहीं आता, इससे मैं मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रही हूं– शिक्षिका सिंपा वर्मा
ट्रेड बंद करने पर बढ़ा तनाव: शिक्षक हुलेश टंडेल ने बताया कि मशीनरी ट्रेड, जिसमें छात्रों का अच्छा प्लेसमेंट जिंदल, नगरनार और अन्य उद्योगों में हो रहा है, उसे बंद करने के लिए संस्था प्रमुख ने पत्र लिखा है. उनका कहना है कि अगर यह ट्रेड बंद हुआ तो मैं आत्महत्या कर लूंगा.
संस्था प्रमुख ने कहा, आरोप निराधार: संस्था प्रमुख आर.के. कुर्रे ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि शनिवार अवकाश के संबंध में उन्हें कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है. उनका कहना है कि वे हमेशा शिक्षकों के साथ सहयोगी माहौल में काम करने की कोशिश करते हैं. फिलहाल मामला जिला प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग तक पहुंच चुका है. विभागीय जांच की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा.
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