Dhar News: धार में भीषण गर्मी का सितम; गर्म जमीन पर बैठकर शादी की दावत खाने को मजबूर पूरा गांव, तस्वीरें वायरल

मध्य प्रदेश

डही (धार)। क्षेत्र के आदिवासी समाज के विवाह आयोजन आज भी दिखावे से दूर सादगी से हो रहे हैं। आदिवासी समाज तमाम तामझाम और झंझट से दूर होते हुए खेतों और खलिहानों में शादियों के आयोजन कर रहा है। शादियों की दावत में मेहमानों, रिश्तेदारों के साथ पूरे गांव के लोग शामिल हो रहे हैं। खास बात यह है कि इनकी दावत में जमीन ही बिछौना बन जाती है। इस भीषण गर्मी में खेतों की गर्म जमीन पर वह भी बिना बिछौना के बैठकर सभी दावत में शामिल हो रहे हैं।

एक ओर खर्चीली शादियां कई समाजों में शानो-शौकत का माध्यम बन गई है। वहीं आदिवासी समाज में होने वाली शादियां अन्य समाजों के लिए मिसाल के रूप में देखी जा सकती है। क्षेत्र में आदिवासी समाज में शादियों की खूब धूम मची हुई है। यह धूम मई के पूरे महीने तक रहेगी।

खाने से अधिक नाच-गाने में रुचि अधिक

खास बात यह है कि इनकी दावतों में जमीन ही बिछौना बन जाती है। जहां इन दिनों आसमान से आग बरसती गर्मी में लोग घर से निकलने में कतरा रहे हैं। वहीं मेहनतकश आदिवासियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। वैवाहिक आयोजन भी इस भीषण गर्मी में खुले खेतों में हो रहे हैं। तपती दोपहरी में खेतों की ढेकलेनुमा गरम मिट्टी पर ही शादी की दावते हो रही है। कहीं कोई बिछौना नहीं, न कोई छोटा, न बड़ा, सब के सब जमीन पर बिना बिछौने के बड़े मजे से दावते खा रहे हैं।

दरअसल, इस सबके बीच आदिवासियों की वह सोच शामिल है, जो इन्हें अन्य समाजों से अलग बनाती है। बरात जब वधू के घर की दहलीज पर पहुंचती है, तो खुले खेतों में इंतजाम होने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। शादी की दावत में घराती-बराती के अलावा पूरा गांव शामिल होता है। ऐसे में खेतों में जिसे जहां भी जगह मिल जाती है, वहीं बैठकर भोजन खा लेते हैं। बिछौने का इंतजाम चाहे हो या न हो। खाने से ज्यादा समाज के महिला-पुरुषों की रुचि नाच-गाने में अधिक होती है।

दावत में तोली चौकी घाट का महत्व आज भी बरकरार

सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गेश चौहान और लोकेश अलावा का कहना है कि वक्त के साथ दाल-बाटी और साग-पूड़ी की दावत भी आदिवासी समाज की शादियों में दिखाई दे रही है। इसके बावजूद दावत में गेहूं से बने तोली चौकी घाट का बड़ा महत्व आज भी बरकरार है। उन्होंने कहा कि तोली चौकी घाट काफी स्वादिष्ट होती है और सभी इसे प्रेम भाव से साथ मिल-बैठकर खाते हैं। समाज की शादियों में तोली चौकी घाट खाने की परंपरा वर्षो से प्रचलित है। आमतौर पर इसे गरीबों की दावत कहा जाता है। इसके बावजूद तोली चौकी घाट को समाज का बड़ा और सक्षम तबका भी अपनाए हुए है।

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