धमतरी: शहर के कई इलाकों में संचालित प्रार्थना सभाओं एवं कथित धर्मांतरण गतिविधियों को लेकर हिन्दू जागरण मंच ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. आज शहर के अलग-अलग वार्डों में हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता पहुंचे और अस्थायी रूप से संचालित कथित चंगाई सभाओं का विरोध जताया. इस दौरान कुछ स्थानों पर कथित पास्टरों के साथ नोक-झोंक की स्थिति भी बनी. मौके पर पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति को नियंत्रित किया गया.
चंगाई सभाओं का विरोध
हिन्दू संगठनों की ओर से शहर के कमल विहार, सेन चौक श्रीराम नगर, अम्बेडकर चौक, मदरसा गली श्यामतराई मंडी के पास, डिपो पारा सोरिद और टिकरापारा सहित कई क्षेत्रों में पहुंचकर प्रार्थना सभाओं को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई. संगठन का आरोप है कि नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक विभिन्न स्थानों पर लगातार प्रार्थना सभाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन शिकायतों और ज्ञापनों के बावजूद प्रशासन द्वारा प्रभावी जांच और वैधानिक कार्रवाई नहीं की जा रही है.
अभी भी कई जगहों पर चंगाई सभा का आयोजन हो रहा है. अवैध तरीके से धर्मांतरण की कोशिशें जारी हैं. आज जब हम यहां पर पहुंचे तो कई लोग यहां पर मौजूद थे. हमने जब उनके उनकी पहचान और उनके पहचान पत्र मांगे तो वो देने में आनाकानी करने लगे: चित्रेश साहू, जिला सहसंयोजक, हिन्दू जागरण मंच
अभी नगर में बेरोक टोक धर्मांतरण का काम जारी है. पुलिस को चाहिए कि इस तरह के कामों पर रोक लगनी चाहिए. पुलिस अगर इसपर रोक लगाने में नाकाम साबित होती है तो हम प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी पुलिस पर होगी: पुरुषोत्तम निषाद, जिला संयोजक, हिन्दू जागरण मंच
हिन्दू जागरण मंच का प्रदर्शन
हिन्दू जागरण मंच के सदस्यों ने बताया कि इससे पहले भी जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी कानूनों का सख्ती से पालन कराने की मांग की जा चुकी है. रविवार को भी संगठन पदाधिकारियों ने प्रशासन से प्रार्थना सभाओं की निष्पक्ष जांच कराने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग दोहराई. जिला संयोजक पुरुषोत्तम निषाद ने कहा कि संगठन लगातार प्रशासन को विभिन्न क्षेत्रों में संचालित प्रार्थना सभाओं की जानकारी उपलब्ध करा रहा है, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है. उन्होंने कहा कि यदि शासन द्वारा बनाए गए नियमों का पालन जमीनी स्तर पर नहीं होगा तो समाज में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है.
कानूनी कार्रवाई की मांग की
जिला सहसंयोजक चित्रेश साहू ने कहा कि संगठन का उद्देश्य समाज में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना है. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जिले के सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित कर प्रत्येक प्रार्थना सभा की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. मंच के पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जिले में बाहरी राज्यों से आए कुछ लोगों द्वारा धार्मिक गतिविधियां संचालित किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं, जिसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए. संगठन ने स्पष्ट किया कि हिन्दू जागरण मंच आगे भी जनभावनाओं और कानून पालन के मुद्दे को लोकतांत्रिक तरीके से प्रशासन के समक्ष उठाता रहेगा.
धर्मांतरण की स्पष्ट परिभाषा
19 मार्च 2026 के सदन में पेश किए गए धर्मांतरण बिल में सभी प्रावधान स्पष्ट किए गए थे. इस विधेयक के तहत अवैध धर्मांतरण में किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध मनोवैज्ञानिक दबाव या शारीरिक बल (प्रपीड़न) के माध्यम से धर्म बदलने के लिए मजबूर करना शामिल है. कानून में “प्रलोभन” के दायरे को भी काफी बढ़ाया गया है. अब नकद उपहार, रोजगार का वादा, मुफ्त शिक्षा, बेहतर जीवनशैली का प्रलोभन या किसी धर्म के रीति-रिवाजों को दूसरे के विरुद्ध गलत तरीके से प्रस्तुत करना भी अपराध की श्रेणी में आएगा. विशेष रूप से, यदि कोई व्यक्ति अपने पैतृक धर्म या आस्था में वापस आता है, तो इसे इस अधिनियम के तहत धर्मांतरण नहीं माना जाएगा.
7 अप्रैल से छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण कानून लागू हो गया है, इस कानून के फायदे जानिए
- बलपूर्वक या धोखे से किए गए धर्मांतरण पर रोक लगेगी
- डिजिटल माध्यमों और प्रलोभन के जरिए होने वाले धर्म परिवर्तन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी
- कानून के अनुसार बल, प्रलोभन, दबाव, झूठी जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना अब प्रतिबंधित हो गया
- कोई स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले से सूचना देनी होगी
- प्रस्तावित धर्म परिवर्तन की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी
- 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा
- पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा
- अवैध धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख जुर्माना लगेगा
- यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख का जुर्माना होगा
- सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख जुर्माना लगेगा
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