दुर्ग : देव बलौदा चरोदा में प्राचीन शिवमंदिर के प्रांगण में लगे मेला में जमकर विवाद हुआ. यहां हिंदू संगठन ने कुछ दुकानों में जाकर उसे बंद कराने की कोशिश की.हिंदू संगठन का आरोप था कि मेला के दौरान कई व्यापारी यहां आकर अपनी दुकान सजाते हैं.लेकिन इस दौरान देखा गया है कि उनकी दुकान का नाम हिंदू देवी देवता के नाम पर होता है,लेकिन जब पेमेंट करने के लिए QR स्कैन किया जाता है तो खाता किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति के नाम से दिखता है. ऐसे में साफ जाहिर होता है कि यहां पर लोग अपना धर्म छिपाकर व्यापार करते हैं.इसकी वजह से हिंदू धर्म के ग्राहक धोखे का शिकार हो रहे हैं.
कैसे शुरु हुआ विवाद ?
बताया जा रहा कि विवाद की शुरुआत एक गुपचुप विक्रेता के ठेले से हुई. गुपचुप ठेले पर अजीत चाट भंडार और जय माता दी लिखा था, जबकि ऑनलाइन भुगतान के लिए क्यूआर कोड स्कैन करने पर अलग नाम दिखाई देने का दावा किया गया. इसके बाद कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई और अन्य दुकानदारों की भी जांच शुरू कर दी. आरोप है कि इस दौरान कुछ व्यापारियों के साथ गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की गई, जिसके वीडियो भी सामने आए हैं.
प्रशासन ने संभाला मोर्चा
मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने निगम और पुलिस से कार्रवाई की मांग की. हालांकि पुलिस ने तत्काल कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया, लेकिन भिलाई-चरोदा नगर निगम की टीम ने एक दुकानदार का ठेला जब्त कर लिया. घटना के दौरान सीएसपी छावनी, भिलाई-3 थाना प्रभारी और पुलिस बल मौजूद थे, मगर उन्होंने स्थिति पर नजर बनाए रखी. कई दुकानदारों का आरोप है कि उन्हें धमकाते हुए दुकान समेटने को कहा गया. वहीं कुछ कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम व्यापारियों पर अविश्वास जताते हुए तीखी टिप्पणियां भी की.घटना के बाद मेले की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं. फिलहाल मामले को लेकर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है.
पहचान छिपाकर व्यापार करने का आरोप
आपको बता दें कि दुर्ग जिले के देव बलौदा चरोदा स्थित प्राचीन शिव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर बड़ा मेला लगता है. इसी दौरान हिंदू संगठनों ने दूसरे धर्म के दुकानदारों पर पहचान छिपाकर व्यापार करने का आरोप लगाया.इस घटना के सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने मेला परिसर में लगी दूसरी दुकानों पर भी जाकर जांच पड़ताल शुरु की.
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