Deoghar News: उद्घाटन के इंतजार में दम तोड़ रहा देवघर का ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’, खुद ही होने लगा रोग का शिकार

झारखण्ड

देवघर: स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर झारखंड के संथाल प्रमंडल की बात करें तो यहां पर स्थिति काफी खराब है. क्योंकि आज भी संथाल क्षेत्र के कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अस्पताल नसीब नहीं है. वहीं कई क्षेत्रों में अस्पताल बनकर तैयार तो हैं, लेकिन अभी तक वह उपयोग में नहीं आ पाया है. कुछ ऐसा ही हाल देवघर जिले में देखने को मिल रहा है. बाबा मंदिर के पास बने भारत सरकार का आरोग्य मंदिर अस्पताल आज भी उद्घाटन के इंतजार में बंद पड़ा है.

बंद पड़ा भवन होने लगा जर्जर

भारत सरकार के द्वारा आयुष्मान आरोग्य मंदिर का निर्माण इसलिए कराया गया था, ताकि लोगों को उच्च स्तर का इलाज अपने घर के आसपास ही मिल सके. इसी उद्देश्य के साथ देवघर के बाबा मंदिर के पास शिवगंगा तालाब के किनारे आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाया गया था. लेकिन अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हुई है. ईटीवी भारत की टीम ने जब इसकी पड़ताल की तो देखा कि कई महीनों से यहां पर ताला लगा हुआ है. साथ ही बंद पड़े भवन की स्थिति भी धीरे-धीरे जर्जर होती जा रही है.

कई वर्ष पहले से भवन बनकर तैयार है: स्थानीय

स्थानीय लोगों से जब बात की तो मंदिर के पास रहने वाले पुरोहित जयदीप बताते हैं कि कई वर्ष पहले ही इसका निर्माण हो गया था. लेकिन अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हो पाई है. मंदिर के आसपास रहने वाले दस हजार से ज्यादा की आबादी सदर अस्पताल या फिर निजी अस्पताल के भरोसे अपना इलाज करवाते हैं. उन्होंने कहा कि अगर यह आरोग्य मंदिर अस्पताल खुल जाता तो मंदिर के आसपास रहने वाली आबादी और मंदिर में प्रतिदिन आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को राहत मिलता.

मैन पावर की कमी से नहीं हुआ है शुरू: सिविल सर्जन

 शिवगंगा तट पर बने आरोग्य मंदिर के शुरू नहीं होने को लेकर बताया कि अस्पताल पूरी तरह से तैयार हो चुका है. अस्पताल के अंदर सारे उपकरण भी लगा दिए गए हैं. मैन पावर की कमी की वजह से अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हुई है. सीएस ने कहा कि संबंधित सीएचओ को आदेश दिए गए हैं.

सिविल सर्जन डॉक्टर रमेश कुमार ने बताया कि जल्द ही शिवगंगा तट पर बने आरोग्य मंदिर की शुरुआत कर दी जाएगी. जिससे सावन के दौरान आने वाले हजारों यात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा सके. मालूम हो कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर भारत सरकार की एक बेहतर पहल है. इसके माध्यम से शहर और ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे आम लोगों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जा सका. अब देखने वाली बात होगी कि लाखों की लागत से बने आयुष्मान आरोग्य मंदिर कब तक शुरू हो पाता है.

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