लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने विपक्ष पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि विपक्ष के पास स्पीकर के खिलाफ बोलने के लिए कुछ नहीं. ये लोग डिमांड फर्स्ट, डिस्टर्ब लेटर की नीति अपना रहे हैं. जोशी ने कहा कि केवल एक परिवार के कहने से सबकुछ थोड़े ही चलेगा. ठीक है वो स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं. मगर उसका एक प्रोसेस है. हम चर्चा करने के लिए तैयार हैं लेकिन विपक्ष का मकसद केवल हंगामा करना है.
प्रल्हाद जोशी ने आगे कहा कि जब प्रस्ताव पेश किया जाता है, तो 50 लोगों को इसके समर्थन में खड़ा होना चाहिए. आज चेयर पर जगदंबिका पाल बैठे थे. उन्होंने बार-बार कहा कि अगर आप प्रस्ताव पेश करना चाहते हैं, तो मैं चर्चा की अनुमति देता हूं. उन्होंने कहा कि जब अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव एजेंडा में है, तो आप बीच में दूसरा प्रस्ताव, दूसरा स्थगन प्रस्ताव कैसे ला सकते हैं?
‘विपक्ष की नीति डिमांड फर्स्ट, डिस्टर्ब लेटर वाली’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि क्या कोई नियम है या नहीं? क्या कोई संविधान नहीं है? अगर हमें सदन को राहुल गांधी के कहे अनुसार चलाना है, तो नियम की क्या जरूरत है? यह कैसी थ्योरी है कि ये लोग पहले मांग करते हैं और बाद में बाधा डालते हैं? जब मैं संसदीय कार्य मंत्री था, तब ऐसा कई बार होता था. वे मानते हैं कि जो वे कहते हैं वही नियम है. जिस भी विषय पर चर्चा होनी है, उस पर पहले सदन समिति में निर्णय होना चाहिए.
अविश्वास प्रस्ताव पर सोमवार को होनी थी चर्चा
दरअसल, अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा सोमवार को होनी थी, लेकिन पश्चिम एशिया के हालात पर सदन में चर्चा कराने की विपक्ष की मांग को लेकर हंगामे के कारण कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी और चर्चा नहीं हो सकी. विपक्षी दलों के सदस्यों ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा कराने की मांग को लेकर हंगामा किया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई.
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