नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कड़े रुख के आगे मांग स्वीकार करते हुए जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन चलने के मामले में औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
घटना के करीब 31 दिन बाद यह FIR दर्ज की गई। राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश और अन्य वरिष्ठ नेता पीड़ित साहिल लोचब और उनकी माता को लेकर संसद मार्ग (पार्लियामेंट स्ट्रीट) पुलिस थाने में धरने पर बैठे थे। लगभग 7 घंटे तक चले तीव्र विरोध और बातचीत के बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ।
⚖️ BNS की धारा 118 और 125 के तहत दर्ज हुआ मुकदमा
प्राथमिकी में शामिल कानूनी धाराओं का विवरण:
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BNS सेक्शन 118: भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 118 के तहत घातक हथियारों या खतरनाक साधनों से जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाने के अपराध का प्रावधान है।
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BNS सेक्शन 125: दूसरों के जीवन, स्वास्थ्य या व्यक्तिगत सुरक्षा को संकट में डालने वाले कृत्यों के तहत यह धारा लगाई गई है।
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अज्ञात के खिलाफ केस: पुलिस ने प्रारंभिक स्तर पर मामले की तहकीकात के लिए अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
🏛️ ‘जब तक FIR नहीं होगी, 6 महीने तक धरने पर बैठूंगा’: राहुल गांधी की चेतावनी
थाने के भीतर चले घटनाक्रम का विवरण:
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मंदिर मार्ग से संसद मार्ग तक: राहुल गांधी पीड़ित परिवार के साथ पहले मंदिर मार्ग थाने पहुंचे, जहां से स्पष्ट जवाब न मिलने पर वे पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में डीसीपी (सेंट्रल) सचिन शर्मा से मिलने पहुंचे।
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थाने में धरना: सहमति न बनने पर कांग्रेस नेता डीसीपी कार्यालय परिसर में ही धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी ने कड़े शब्दों में कहा कि अगर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, तो वे 30 दिन या 6 महीने तक भी धरने से पीछे नहीं हटेंगे।
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‘ऊपर से आर्डर’ का आरोप: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने उनसे कहा था कि ऊपर से आदेश होने के कारण एफआईआर दर्ज करने में रुकावट आ रही है।
👁️ NEET विरोध प्रदर्शन में लगी थी पेलेट, AIIMS में हुई थी सर्जरी
पीड़ित की स्थिति और मेडिकल साक्ष्य:
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20 जुलाई का प्रदर्शन: NEET पेपर लीक और अन्य विसंगतियों के खिलाफ 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान साहिल लोचब के शरीर और आंख पर पेलेट के छर्रे लगे थे।
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AIIMS ट्रॉमा सेंटर की रिपोर्ट: राहुल गांधी ने अस्पताल के मेडिकल दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि छात्र की आंख से पेलेट के छर्रे निकाले गए और सर्जरी करानी पड़ी।
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पुलिस के दावों पर सवाल: गांधी ने सवाल उठाया कि अगर पुलिस कर्मियों ने पेलेट गन नहीं चलाई, तो किसी न किसी ने तो इसका इस्तेमाल किया है, जो अपने आप में एक गंभीर अपराध है और इसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है।
📄 14 अगस्त से पेंडिंग थी शिकायत, धरने के बाद बनी बात
पुलिसिया कार्रवाई और टाइमलाइन:
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शिकायत का इतिहास: साहिल लोचब ने अपने अधिवक्ताओं के साथ 14 अगस्त को पुलिस में लिखित तहरीर दी थी और 17 अगस्त को ईमेल व फोन से भी संपर्क किया था, किंतु कोई केस दर्ज नहीं हुआ।
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धरने से निकला समाधान: अंततः कांग्रेस नेतृत्व के हस्तक्षेप और थाने के भीतर घंटों चले शांतिपूर्ण विरोध के बाद पुलिस प्रशासन ने शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच अधिकारी नियुक्त करने की सहमति दी।
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