नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार की उस कार्रवाई पर तीखी आपत्ति जताई, जिसके तहत पब्लिक वेलफेयर का हवाला देकर जमीन खाली कराई जा रही है। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने सख्त लहजे में कहा कि विकास के नाम पर शहर के फेफड़ों (हरित क्षेत्रों) को छीनना खतरनाक है।
🏗️ “क्या आप दिल्ली को सिर्फ कंक्रीट का जंगल बनाना चाहते हैं?”
जब केंद्र सरकार के वकील ने जमीन खाली कराने के फैसले को ‘जनहित’ में बताया, तो हाई कोर्ट ने पलटवार करते हुए कहा, “आप दिल्ली के लोगों को छोटे-मोटे पहाड़ पर रहने के लिए भेजेंगे क्या? यह हमारे पास बचा एकमात्र फेफड़ा (हरित क्षेत्र) है, आप उसे भी छीनना चाहते हैं। ऊंची इमारतें बनाना क्या पब्लिक इंटरेस्ट है? हर कॉलोनी को गिराकर 20 मंजिला घर बनाए जा रहे हैं। अगर दिल्ली का यही हश्र होना है, तो भगवान ही हमें बचाए।”
⚖️ अदालती निर्देश और भविष्य की चिंता
कोर्ट ने केंद्र के वकील से साफ शब्दों में कहा कि भले ही सरकार ताकतवर हो, लेकिन इस तरह की अंधाधुंध निर्माण गतिविधियों से दिल्ली घुट जाएगी। कोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट को निर्देशित किया है कि वह बुधवार को स्टे एप्लीकेशन (Stay Application) पर सुनवाई करे और गुण-दोष के आधार पर फैसला ले।
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