धनबाद की एमपी-एमएलए विशेष अदालत में टला फैसला: तकनीकी कारणों से रुकी बहुचर्चित हत्याकांड की सुनवाई

झारखण्ड

धनबाद (झारखंड): कोयलांचल के बहुचर्चित रंजय सिंह हत्याकांड में शनिवार को अदालत का अंतिम फैसला नहीं आ सका। धनबाद स्थित एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय के विशेष न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत में इस मामले पर अंतिम फैसला सुनाया जाना निर्धारित था, परंतु तकनीकी कारणों के चलते आदेश सुरक्षित रखते हुए फैसला टाल दिया गया। अब अदालत द्वारा इस मामले में फैसला सुनाने के लिए अगली नई तारीख निर्धारित की जाएगी, जिसके बाद ही फैसले की घड़ी तय होगी।

👤 पूर्व मेयर संजीव सिंह के बेहद करीबी थे रंजय सिंह: 23 गवाहों की गवाही के बाद था फैसले का इंतजार

मामले की कानूनी पृष्ठभूमि और वकीलों का बयान:

  • करीबी संबंध: रंजय सिंह पूर्व मेयर संजीव सिंह के बेहद करीबी और विश्वसनीय माने जाते थे, जिसके चलते यह हत्याकांड शुरुआत से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रहा है।

  • ट्रायल पूरा: करीब नौ वर्ष पुराने इस हत्याकांड में अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से 23 गवाहों के बयान और लंबी अंतिम बहस की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी थी।

  • वकील का बयान: रंजय सिंह की पत्नी रूमी देवी के अधिवक्ता मोहम्मद जावेद ने बताया कि शनिवार को अदालत में फैसला आना तय था, लेकिन अपरिहार्य तकनीकी कारणों की वजह से इसे टाल दिया गया है और अब कोर्ट की अगली तारीख का इंतजार है।

🔫 29 जनवरी 2017 को गोलियों से भूनकर की गई थी हत्या: सरायढेला के चाणक्य नगर मोड़ की वारदात

वारदात का घटनाक्रम और चश्मदीद:

  • सरेराह फायरिंग: 29 जनवरी 2017 को सरायढेला थाना क्षेत्र अंतर्गत चाणक्य नगर मोड़ के पास अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर रंजय सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

  • प्रमुख चश्मदीद: घटना के समय रंजय सिंह अपने सहयोगी राजा यादव के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर जा रहे थे। इस जानलेवा हमले में राजा यादव बाल-बाल बच गए थे और बाद में पुलिस जांच में वे इस पूरे मामले के मुख्य चश्मदीद गवाह बने।

  • आरोपियों की भूमिका: पुलिसिया जांच में नंदकुमार सिंह उर्फ ‘मामा’ को मुख्य शूटर/आरोपी बनाया गया, जबकि हर्ष सिंह पर हत्याकांड की आपराधिक साजिश रचने और शूटरों को संरक्षण व सहयोग देने का आरोप तय किया गया था।

⏳ 9 वर्षों से अदालत में विचाराधीन है मामला: वर्चस्व और पुरानी रंजिश से जुड़े तार

विवाद की जड़ें और आगामी फैसले पर नजर:

  • विवाद की शुरुआत: पुलिस अनुसंधान में यह तथ्य भी सामने आया था कि संजीव सिंह के काफिले को रास्ता देने को लेकर उपजे विवाद के बाद दोनों गुटों के बीच तल्खी और तनाव चरम पर पहुंच गया था।

  • कोयलांचल की खूनी रंजिश: रंजय सिंह की हत्या के कुछ ही समय बाद पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार लोगों की सामूहिक हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया था, जिससे धनबाद का कोयलांचल गैंगवार और खूनी रंजिश की आग में घिर गया था।

  • अगली तारीख पर फैसला: लगभग 9 साल तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया, 23 गवाहों की गवाही और अंतिम बहस पूरी हो जाने के बाद अब सभी पक्षों की निगाहें अदालत द्वारा तय की जाने वाली अगली तारीख पर टिकी हैं।

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