जालंधर में सड़कों पर घूम रही मौत, आम लोगों के लिए बढ़ता जा रहा खतरा

पंजाब

जालंधर: शहर में बिल्डिंग मैटेरियल का कारोबार करने वाले हजारों दुकानदार खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। रेत, बजरी, मिट्टी, ईंट, सरिया और लोहा बेचने वाले अधिकतर व्यापारी अपने माल की ढुलाई बिना रजिस्ट्रेशन नंबर वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों या टेम्पो से करवाते हैं, जिनके चालक न केवल बिना लाइसेंस के वाहन चलाते हैं बल्कि कई बार पूरी तरह अनुभवहीन भी होते हैं।

यही लापरवाही अब तक कई जानलेवा हादसों की वजह बन चुकी है, मगर न तो ट्रैफिक पुलिस और न ही प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई की है। ऐसे वाहनों के खिलाफ कभी ठोस अभियान तक नहीं चलाया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में जगह-जगह फैले इन बिल्डिंग मैटेरियल के गोदामों से रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बिना नंबर प्लेट और फिटनेस के सड़कों पर दौड़ती हैं। ये वाहन अक्सर ओवरलोड होते हैं और गलियों-मोहल्लों में भी प्रवेश कर जाते हैं, जिससे सड़कें टूट रही हैं और आम लोगों के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है। कई बार ये ट्रैक्टर तेज रफ्तार में आते हैं और बच्चों, बुजुर्गों या राहगीरों को चोटिल कर देते हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई हादसे सामने आए हैं, जिनमें जानें तक जा चुकी हैं।

इसी तरह सरिया और लोहा बेचने वाले दुकानदार भी अपने माल की सप्लाई टेम्पो या ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से करवाते हैं, जिनके ड्राइवरों के पास वैध लाइसेंस तक नहीं होता। कुछ व्यापारी तो घोड़ा-गाड़ी या रिक्शों में भी भारी माल भेज देते हैं, जो बेहद खतरनाक है। इन वाहनों में न तो कोई सुरक्षा इंतज़ाम होता है और न ही सड़क सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन की इस अनदेखी से दुर्घटनाओं का खतरा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि ट्रैफिक पुलिस ने कभी इन वाहनों का चालान तक नहीं किया। कई बार शिकायतें होने के बावजूद न तो कोई जांच हुई और न ही किसी पर कार्रवाई।

लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह लापरवाही जारी रही, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत सख्त कदम उठाए , सभी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और टेम्पो का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाए, बिना लाइसेंस वाहन चलाने वालों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाए, बिना परमिट सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों पर रोक लगाई जाए।

यह स्थिति न केवल ट्रैफिक नियमों की खुली अवहेलना है, बल्कि प्रशासन की लापरवाही का भी बड़ा उदाहरण है। अब देखना यह है कि क्या नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन मिलकर इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर शहरवासी इसी खतरे के साए में जीने को मजबूर रहेंगे।

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