शहडोल: रबी फसल की कटाई के बाद खेत में किसान अगली फसल लगाने की तैयारी कर रहें हैं. वहीं, कुछ किसान खेत खाली छोड़ देते हैं. इसको लेकर कृषि वैज्ञानिक डॉ मृगेंद्र सिंह किसानों को जायद फसल की बुआई करने की सलाह दे रहे हैं. वे ये भी बता रहे हैं कि किन फसलों को प्राथमिकता देना चाहिए, जो कम समय में तैयर हो सकते हैं. जिससे किसानों को लाभ होगा और अच्छी कमाई भी कर सकते हैं.
जायद फसल से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता
रबी सीजन की फसल का अब आखिरी चरण चल रहा है. होली के बाद से इन फसलों की कटाई भी शुरू हो जाएगी. ऐसे में किसानों ने अब जायद की फसल की तैयारी भी शुरू कर दी है. लेकिन ज्यादातर किसान जायद खेती करने से बचते हैं. क्योंकि जायद फसल में पानी की भी जरूरत होती है. ऐसे में कृषि वैज्ञानिक डॉ. मृगेंद्र सिंह ने किसानों को उन 2 फसलों को ट्राई करने की सलाह दे रहे हैं, जो केवल पैसा ही नहीं दिलाएंगी, बल्कि खेत के मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाएगी. क्योंकि उड़द और मूंग के अपशिष्ट खेतों में खाद की तरह काम करते हैं.
कम समय और मेहनत में बेहतर उत्पादन
कृषि वैज्ञानिक डॉ. मृगेंद्र सिंह बताते हैं कि “उड़द और मूंग ये 2 ऐसी फसले हैं, जो 60 से 65 दिन में तैयार जाती हैं. उनके अलग-अलग किस्म हैं, जिसमें 2-4 दिन या 10 दिन का अंतर होता है. लेकिन इन फसलों के लिए किसान के पास पानी का साधन बेहतर होना चाहिए. ये दोनों फसलें कम समय में तैयार हो जाती हैं और किसानों को अच्छा मुनाफा भी देती है. इसके साथ ही इनमें सब्जियों की खेती से भी कम मेहनत और कम देखरेख की भी जरूरत होती है.”
तिल भी किसानों के लिए बेहतर ऑप्शन
जायद फसल 15 जून के पहले तैयार होकर पक जाए, तो उसमें नुकसान नहीं होता है, लेकिन यदि लेट हो जाए, तो नुकसान हो सकता है. डॉ. मृगेंद्र सिंह बताते हैं कि “अरहर और अलसी की फसल कट चुकी है. ऐसे में यदि खेत खाली है, तो अभी उड़द और मूंग किसानों को लगा देना चाहिए. इससे समय पर फसल पककर तैयार हो जाएगी. इसके साथ ही तिल भी किसानों के लिए जायद फसल के रूप में एक बेहतर ऑप्शन है. लेकिन इसे तैयार होने में 100-105 दिन का समय लगता है.”
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