Credit Card Spending Decline 2026: भारत में क्रेडिट कार्ड खर्च को लगा बड़ा झटका, सितंबर 2026 में आई 5.9% की गिरावट; जानें क्या है वजह

व्यापार

नई दिल्ली: देश के वित्तीय और खुदरा बाजार में क्रेडिट कार्ड के जरिए खरीदारी तथा भुगतान करने की रफ्तार को सितंबर 2026 के दौरान एक स्पष्ट झटका लगा है। भारत में क्रेडिट कार्ड से होने वाला कुल खर्च सालाना आधार पर 5.9% की गिरावट के साथ 2.04 लाख करोड़ रुपए पर सिमट गया। गौरतलब है कि फरवरी 2021 के बाद यह पहला ऐसा मौका है, जब क्रेडिट कार्ड के कुल खर्च में सालाना आधार पर इस तरह की कमी देखने को मिली है। हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट का सीधा यह अर्थ नहीं है कि देश के उपभोक्ताओं ने अचानक खरीदारी करना बंद कर दिया है। इसके पीछे मुख्य तौर पर पिछले वर्ष का बेहद मजबूत बेस, इस बार त्योहारी सीजन की खरीदारी का अक्टूबर महीने में शिफ्ट होना और ऑनलाइन खर्च में आई सुस्ती जैसे कई महत्वपूर्ण कारक जिम्मेदार हैं। दिलचस्प बात यह है कि कुल खर्च में भले ही कमी आई हो, लेकिन देश भर में नए क्रेडिट कार्ड जारी होने और उनकी कुल संख्या में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है।

सितंबर 2026 के आंकड़े और पिछले साल के ऊंचे बेस का प्रभाव

आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में क्रेडिट कार्ड के जरिए कुल खर्च 2.04 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जबकि बीते वर्ष यानी सितंबर 2025 में यह आंकड़ा लगभग 2.17 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर था। इस प्रकार सालाना आधार पर इसमें 5.9% की गिरावट आई। इससे पहले कोरोना महामारी के दौर यानी फरवरी 2021 में ऐसा देखने को मिला था। इस बार इस गिरावट के पीछे एक मुख्य वजह पिछले साल का ऊंचा आधार (High Base) है। पिछले साल सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में बड़े बदलाव और त्योहारी सीजन की ऑनलाइन शॉपिंग सेल्स का जल्दी शुरू हो जाना शामिल था, जिसके कारण कार्ड से खरीदारी में भारी उछाल आया था। इसके विपरीत, इस वर्ष प्रमुख त्योहारी सेल सितंबर के बजाय अक्टूबर में शुरू हुई, जिसके कारण सितंबर के मासिक आंकड़ों में वैसी बड़ी खरीदारी नजर नहीं आई।

ऑनलाइन शॉपिंग में सबसे बड़ी गिरावट, ऑफलाइन दुकानों पर बढ़ा कार्ड का इस्तेमाल

क्रेडिट कार्ड के विस्तृत खर्च का विश्लेषण किया जाए तो सबसे अधिक दबाव ऑनलाइन खरीद फरोख्त के सेगमेंट में दिखाई दिया है। सितंबर 2026 के दौरान ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड खर्च सालाना आधार पर 12.5 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 1.26 लाख करोड़ रुपए पर आ गया, जो कि सितंबर 2025 में 1.44 लाख करोड़ रुपए था। इसके ठीक विपरीत, स्थानीय दुकानों, शोरूम और भौतिक बाजारों में कार्ड के माध्यम से किए जाने वाले भुगतान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खुदरा दुकानों पर क्रेडिट से होने वाले खर्च में लगभग 7.18% की वृद्धि हुई है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि कुल खर्च में आई गिरावट मूल रूप से ई-कॉमर्स और ऑनलाइन शॉपिंग सेगमेंट तक ही सीमित रही है।

प्रमुख बैंकों का प्रदर्शन: HDFC ने संभाला मोर्चा, तो SBI और ICICI कार्ड खर्च में आई सुस्ती

देश के प्रमुख ऋणदाताओं और कार्ड जारीकर्ताओं के प्रदर्शन पर नजर डालें तो सितंबर 2026 में HDFC बैंक ने अन्य प्रतिस्पर्धी बैंकों के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। HDFC बैंक का कुल खर्च 65,140 करोड़ रुपए रहा, जिसमें 7.52% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके मुकाबले एसबीआई कार्ड का खर्च 34,895 करोड़ रुपए (14.09% की गिरावट) और आईसीआईसीआई बैंक का खर्च 30,911 करोड़ रुपए (26.26% की गिरावट) पर रहा। वहीं एक्सिस बैंक का खर्च 23,149 करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जिसमें 11% की कमी आई। HDFC बैंक देश का सबसे बड़ा कार्ड जारीकर्ता बना हुआ है, जबकि SBI कार्ड प्रमुख स्वतंत्र जारीकर्ता के रूप में अपनी स्थिति मजबूत किए हुए है।

खर्च घटने के बावजूद देश में क्यों तेजी से बढ़ रही है क्रेडिट कार्ड की कुल संख्या?

एक तरफ जहां खर्च के आंकड़ों में नरमी आई है, वहीं दूसरी तरफ सितंबर 2026 में देश के भीतर कुल एक्टिव क्रेडिट कार्ड्स की संख्या बढ़कर 12.53 करोड़ के नए उच्च स्तर पर पहुंच गई। सालाना आधार पर इसमें लगभग 10.5% की तेज वृद्धि दर्ज की गई है। बैंकों द्वारा इस दौरान भारी मात्रा में नए कार्ड जारी किए गए; मसलन HDFC बैंक ने 2.80 लाख से अधिक नए ग्राहक जोड़े, एक्सिस बैंक ने करीब 2.60 लाख और एसबीआई कार्ड ने लगभग 2.08 लाख नए कार्ड जारी किए। सितंबर महीने में नए कार्ड्स जुड़ने की यह रफ्तार नवंबर 2024 के बाद से सबसे तीव्र रही है, जो यह दर्शाती है कि बाजार में डिजिटल पेमेंट और क्रेडिट का दायरा लगातार फैल रहा है, हालांकि प्रति कार्ड खर्च की जाने वाली औसत राशि में कमी आई है।

लेन-देन की संख्या बढ़ी लेकिन औसत ट्रांजैक्शन वैल्यू में आई भारी कमी

क्रेडिट कार्ड के मासिक ट्रांजैक्शन के पैटर्न में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सितंबर महीने में कार्ड के जरिए होने वाले कुल लेन-देन की संख्या सालाना आधार पर 23.2% बढ़कर लगभग 61 करोड़ पर पहुंच गई, लेकिन औसत ट्रांजैक्शन वैल्यू 23.6% घटकर केवल 3,343 रुपए रह गई। इसका अर्थ यह है कि उपभोक्ता अब पहले की तुलना में अधिक बार क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं, किंतु प्रत्येक बार खर्च की जाने वाली रकम छोटी होती जा रही है। इसके पीछे एक बड़ा कारण यूपीआई (UPI) प्लेटफॉर्म पर क्रेडिट कार्ड के बढ़ते उपयोग का चलन भी है, जिससे छोटे मर्चेंट भुगतानों में कार्ड का प्रयोग सुगम हो गया है।

अक्टूबर और नवंबर के त्योहारी महीनों में जोरदार वापसी की उम्मीद

वित्तीय बाजार के विश्लेषकों और रेटिंग एजेंसियों का अनुमान है कि आने वाले महीनों यानी अक्टूबर और नवंबर में क्रेडिट कार्ड खर्च के मोर्चे पर मजबूत सुधार देखने को मिलेगा। विशेषकर दिवाली, धनतेरस और अन्य बड़े त्योहारों के दौरान स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, परिधान और यात्रा से जुड़े खर्चों में जबरदस्त उछाल आने की संभावना है। हालांकि, जिंसों की बढ़ती कीमतें और समग्र आर्थिक परिदृश्य उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता को किस प्रकार प्रभावित करते हैं, इस पर भी सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry