Congress Masterstroke: राहुल गांधी का बड़ा दांव! OBC, SC, ST और अल्पसंख्यकों के हाथों में दी चुनाव की कमान

छत्तीसगढ़

रायपुर: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने संगठनात्मक राजनीति में एक बड़ा और दूरगामी बदलाव करते हुए सामाजिक न्याय से जुड़े चार प्रमुख प्रकोष्ठों ओबीसी, एससी, एसटी और माइनॉरिटी विभाग को सीधे चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने का ऐतिहासिक फैसला लिया है. राहुल गांधी की हरी झंडी के बाद अब ये विभाग सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि टिकट वितरण और चुनावी रणनीति जैसे अहम फैसलों में भी अपनी भूमिका निभाएंगे. इसे कांग्रेस की सामाजिक न्याय की राजनीति का गेमचेंजर मूव माना जा रहा है.

राहुल गांधी के आवास पर हुई निर्णायक बैठक

सरगुजा के कांग्रेस नेता और एआईसीसी के ओबीसी डिपार्मेंट के राष्ट्रीय समन्वयक लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता ने जानकारी दी कि मंगलवार को राहुल गांधी के नई दिल्ली स्थित निवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में कांग्रेस के चारों सामाजिक न्याय प्रकोष्ठों के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौजूद रहे.बैठक में के. राजू के साथ डॉ. अनिल जैन (ओबीसी विभाग), राजेंद्र पाल गौतम (एससी विभाग), विक्रांत भूरिया (एसटी विभाग) और इमरान प्रतापगढ़ी (माइनॉरिटी विभाग) शामिल हुए. इस दौरान नेशनल कोऑर्डिनेटर लक्ष्मी गुप्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने जमीनी कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और सामाजिक वर्गों की भावनाओं को मजबूती से सामने रखा.

कांग्रेस इलेक्शन कमिटी में मिलेगा सामाजिक न्याय विभागों को अधिकार

गुप्ता ने आगे बताया बैठक में सर्वसम्मति से यह बड़ा प्रस्ताव पारित किया गया कि देश के हर राज्य की कांग्रेस इलेक्शन कमिटी में इन चारों विभागों के राज्य अध्यक्षों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा. इसका सीधा मतलब यह है कि अब ओबीसी, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समाज की आवाज़ टिकट वितरण और चुनावी रणनीति के केंद्र तक पहुंचेगी.

राहुल गांधी का तत्काल एक्शन, नोटिफिकेशन जारी करने के निर्देश

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव को तुरंत मंजूरी देते हुए संबंधित पदाधिकारियों को तत्काल नोटिफिकेशन जारी करने के निर्देश दिए. यह फैसला कांग्रेस की समावेशी राजनीति, संगठनात्मक लोकतंत्र और सामाजिक भागीदारी को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

राष्ट्रीय नेतृत्व और कोऑर्डिनेटर्स की अहम रणनीतिक बैठक

इसी क्रम में चारों विभागों के राष्ट्रीय नेतृत्व, के. राजू साहब और चारों विभागों के नेशनल कोऑर्डिनेटर्स की एक विस्तृत जूम बैठक भी हुई. इस बैठक में संगठन विस्तार, बूथ लेवल तक मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर गहन मंथन किया गया.

सामाजिक न्याय की राजनीति को मिलेगा नया धारदार तेवर

राष्ट्रीय समन्वयक लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस का यह फैसला दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक समाज की भूमिका को निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में लाने वाला कदम है. अब सामाजिक प्रतिनिधित्व सिर्फ नारा नहीं, बल्कि पॉलिसी और पावर स्ट्रक्चर का हिस्सा बनेगा. कुल मिलाकर कांग्रेस का यह मास्टरस्ट्रोक आने वाले चुनावों से पहले संगठन की संरचना और रणनीति दोनों को बदलने वाला साबित हो सकता है. यह फैसला साफ संकेत देता है कि कांग्रेस अब सामाजिक न्याय की राजनीति को सिर्फ मंच से नहीं, बल्कि फैसलों की मेज से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है.

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