दिल्ली की एक अदालत ने छत्तीसगढ़ में ‘गारे पाल्मा 4/1’ कोयला ब्लॉक के आबंटन में कथित अनियमितताओं के आरोप वाले सी.बी.आई. (CBI) के आरोपपत्र पर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इस मामले में उद्योगपति एवं लोकसभा सदस्य नवीन जिंदल, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारेख और अन्य आरोपियों को सम्मन जारी किया है। अदालत ने सभी आरोपियों को 17 जुलाई को कोर्ट के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है।
📂 एक दशक बाद आई CBI की सबसे भारी-भरकम चार्जशीट
विशेष न्यायाधीश सुनैना शर्मा ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह तात्कालिक आरोपपत्र सी.बी.आई. द्वारा प्राथमिकी (FIR) दर्ज किए जाने के एक दशक से भी अधिक समय बाद दाखिल किया गया है। कानूनी गलियारों और जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, इसे कोयला ब्लॉक मामलों के अब तक के सबसे भारी-भरकम और विस्तृत आरोपपत्रों में से एक बताया जा रहा है, जिसमें कई अहम सबूत शामिल किए गए हैं।
🏢 JSPL समेत इन दिग्गजों को 17 जुलाई को कोर्ट में होना होगा पेश
अदालत ने इस मामले में कॉरपोरेट संस्थाओं और अधिकारियों दोनों पर शिकंजा कसा है। कोर्ट द्वारा मैसर्स जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (JSPL), इसके प्रबंध निदेशक नवीन जिंदल, पी.सी. पारेख, राकेश कुमार जिंदल, राम किशोर, एस.के. अग्रवाल और मैसर्स जिंदल स्ट्रिप्स लिमिटेड (जिसे अब मैसर्स नलवा संस इन्वैस्टमैंट्स लिमिटेड के नाम से जाना जाता है) को सम्मन जारी कर 17 जुलाई को तलब किया गया है। इस सुनवाई पर अब पूरे उद्योग जगत और राजनीतिक हलकों की निगाहें टिकी हुई हैं।
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