महिला आरक्षण बिल को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पार्टी पर जोरदार हमला बोला है. भोपाल में आयोजित जन आक्रोश रैली में उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को शर्म आनी चाहिए. कांग्रेस ने आजादी के समय शुरू की अपनी परंपरा को निभाया. प्रियंका-राहुल के पिता ने भी तीन तलाक के कानून को लेकर बहनों के अधिकार पर डाका डाला था.
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि कांग्रेस और उसके साथी विपक्षी दलों ने बहनों के हक पर डाका डाला है. वे अपने मंसूबों में कभी कामयाब नहीं हो सकते. भारत में बहनों के हक के लिए भाइयों ने सदैव लड़ाइयां लड़ीं. राजा राम मोहन राय ने सती प्रथा के खिलाफ लड़ाई शुरू की. ज्योतिबा फुले ने नारी समानता के लिए लड़ाई लड़ी. डॉ. भीमराव अंबेडकर ने बहनों को अधिकार दिलाने के लिए लड़ाई शुरू की.
सरकार बहनों के निर्णय के साथ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी पार्टी ने चाहा था कि सब दल मिलकर इसका समर्थन करें, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. आज मन में इस बात का आक्रोश है कि हमारी बहनों के लिए जो अवसर मिला था, उसे विपक्ष ने कुचल दिया. हमारी परंपरा तो मातृ सत्ता की रही है. जब तक हम सीता नहीं बोलते, तब तक भगवान राम भी आशीर्वाद नहीं देते. जब तक राधा को याद नहीं करो, तब तक कन्हैया भी मुस्कुराते नहीं हैं. उनका आशीर्वाद नहीं मिलता है. बिना माता के महादेव का आशीर्वाद कैसे मिल सकता है.
विपक्ष की जितनी आलोचना करें, कम
कार्यक्रम में वरिष्ठ विधायक एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि महिला आरक्षण बिल राजनीतिक मुद्दा नहीं था, यह बहनों का अधिकार था. विपक्ष ने इसका समर्थन नहीं किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार चाहते थे कि बहनों को उनका हक मिले. आजादी के बाद राजनीतिक दलों ने इस पर बात भी की. लेकिन, जब फैसला लागू करने का समय आया, तो विपक्ष ने रोड़ा अटका दिया. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने कुठाराघात किया. बहनें कांग्रेस से पूछे कि महिलाओं की उम्मीदें कुचलने का अधिकार उसे किसने दिया. मैं उम्मीद करता हूं बहनों के अंतर्मन में ज्वाला निरंतर जलती रहेगी.
कुछ ऐसा था नजारा
‘आज मैंने सूर्य से बस जरा सा यूं कहा, आपके साम्राज्य में इतना अंधेरा क्यूं रहा?, तमतमा कर वह दहाड़ा- मैं अकेला क्या करूं? संग्राम यह घनघोर है, कुछ मैं लड़ूं कुछ तुम लड़ो.’ कुछ-कुछ इसी कविता की तरह महिलाओं की लड़ाई आज राजधानी की सड़क पर दिखाई दी. मुख्यमंत्री डॉ. यादव खुद पार्टी पदाधिकारियों और महिलाओं के साथ सड़क पर उतरे. इस दौरान गांव-गांव से हजारों महिलाएं भी यहां पहुंचीं. उन्होंने अपने हाथों में कई तरह के स्लोगन लिखे पोस्टर लिए हुए थे. विख्यात गायिका अंबिका जैन अंबर ने भी मंच से महिलाओं को अपने अधिकारियों के लिए जागरूक किया.
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