CJI का पश्चिम बंगाल पर बड़ा बयान! बोले—”बाकी राज्यों में नहीं हुई इतनी मुकदमेबाजी”; जानें SIR रैंकिंग और अदालती बोझ पर क्या कहा?

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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर, अन्य सभी राज्यों में एसआईआर (SIR) का कार्यान्वयन सुचारू रूप से हुआ है. अन्य राज्यों से एसआईआर को लेकर ज्यादा मुकदमेबाजी नहीं हुई है. पश्चिम बंगाल SIR से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने यह टिप्पणी की. वहीं, राज्य के वकीलों का कहना है कि ‘तार्किक विसंगति’ केवल पश्चिम बंगाल में लागू की गई है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल SIR मामले पर SC में सुनवाई 1 अप्रैल तक के लिए टल गई है.

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया अभी भी अधूरी है. साथ ही CJI ने एक न्यूज रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अन्य राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के सत्ता में होने के बावजूद यह प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हुई है.

पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान

पश्चिम बंगाल में 294 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होनी है और 4 मई को गिनती होगी. सुनवाई के दौरान, सीनियर वकील और टीएम,सी नेता मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट से पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट को फ्रीज करने की तारीख बढ़ाने पर विचार करने का आग्रह किया, ताकि लिस्ट से नाम हटाने पर आपत्ति जताने वाले लोगों के नाम पर फैसला किया जा सके और उन्हें जोड़ा जा सके.

इसके जवाब में कोर्ट ने साफ किया कि वह रिक्वेस्ट पर विचार करेगा. कोर्ट ने कहा, अगर जरूरत हुई तो हम सोचेंगे. अभी सब ठीक चल रहा है.

बाकी राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी

साथ ही, बेंच ने बताया कि SIR की वजह से ज्यादातर दूसरे राज्यों में इतने ज्यादा केस नहीं हुए हैं. CJI ने कहा, पश्चिम बंगाल को छोड़कर, जिन भी राज्यों में SIR किया गया, हर जगह यह आसानी से हुआ. दूसरे राज्यों में भी, मुश्किलें हैं, अगर उतनी नहीं तो, लेकिन मुश्किलें हैं. लेकिन कुल मिलाकर, दूसरे राज्यों से शायद ही कोई केस आया हो.

सुप्रीम कोर्ट ने पहले पश्चिम बंगाल की स्थिति की खासियत को देखते हुए निर्देश जारी किए थे. 28 फरवरी को पब्लिश हुए पोस्ट-SIR इलेक्टोरल रोल में करीब 60 लाख नाम अंडर एडजुडिकेशन के तौर पर मार्क किए गए थे. इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, सप्लीमेंट्री लिस्ट में करीब 29 लाख वोटर्स के नाम हैं जिनके केस ज्यूडिशियल ऑफिसर्स ने एडजुडिकेट किए हैं.

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