गलवान के बाद पहली बार: बीजेपी मुख्यालय पहुंचा चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का डेलिगेशन, ‘पार्टी-टू-पार्टी’ रिश्तों पर हुआ मंथन।

देश

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को बीजेपी मुख्यालय पहुंचा. इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उसके इंटरनेशनल डिपार्टमेंट की वाइस मिनिस्टर सुन हैयान ने किया. बीजेपी के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी . उन्होंने बताया कि पार्टी के जनरल सेक्रेटरी अरुण सिंह के नेतृत्व में बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने बीजेपी और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के बीच पार्टी-स्तरीय बातचीत को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की.

उन्होंने कहा कि भारत में चीनी राजदूत, जू फेइहोंग भी CPC प्रतिनिधिमंडल में शामिल हुए. चौथाईवाले ने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल, IDCPC की वाइस मिनिस्टर सुन हैयान के नेतृत्व में आज बीजेपी के हेड ऑफिस आया.

बौद्ध वास्तुकला के लिए अहम स्थान रखती है

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अरुण सिंह ने भी पोस्ट के जरिए बताया की चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (IDCPCC) के इंटरनेशनल डिपार्टमेंट की वाइस मिनिस्टर सुन हैयान ने आज बीजेपी हेड ऑफिस का दौरा किया. मीटिंग के दौरान हमने बीजेपी और CPC के बीच कम्युनिकेशन और बातचीत को कैसे बढ़ाया जाए, इस पर चर्चा की.

शंघाई में भारतीय दूतावास ने बताया कि हाल ही में शंघाई में भारत के कॉन्सल जनरल प्रतीक माथुर ने चीन के सूज़ौ में टाइगर हिल पगोडा का दौरा किया, ताकि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा उद्घाटन की गई भव्य प्रदर्शनी “द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ़ द अवेकन्ड वन” के उद्घाटन को प्रमुखता से याद किया जा सके. सूज़ौ के प्राचीन शहर में स्थित टाइगर हिल पगोडा, यांग्त्ज़ी नदी के दक्षिण में सबसे पुराना और सबसे बड़ा बौद्ध पगोडा है. यह जगह बौद्ध वास्तुकला, इतिहास और कला में एक अहम स्थान रखती है.

भगवान बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित प्रदर्शनियां

इस दौरे के दौरान, कॉन्सल जनरल ने बौद्ध भिक्षुओं और स्थानीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत की. इसमें फ्रेंड्स ऑफ इंडिया भी शामिल थे. उन्होंने 127 साल बाद भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा रत्न के भारत लौटने पर जोर दिया, और इसे भारत की आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत के लिए गर्व का क्षण बताया. इस कार्यक्रम में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक प्रदर्शन भी हुए. शंघाई में भारतीय दूतावास ने बताया कि ये प्रदर्शन पिपरहवा अवशेष प्रदर्शनी के आसपास गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव और मज़बूत भावनाओं को दर्शाते हैं.

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