Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वप्नदृष्टा डॉ. खूबचंद बघेल की पुण्यतिथि पर पूरे प्रदेश में दी जाएगी श्रद्धांजलि

छत्तीसगढ़

रायपुर: राष्ट्रीय आंदोलन और आजादी की लड़ाई में छत्तीसगढ़ के कई क्रांतिकारी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने हिस्सा लिया था. उनमें से एक नाम है डॉक्टर खूबचंद बघेल का. डॉक्टर खूबचंद बघेल की पुण्यतिथि 22 फरवरी को मनाई जाएगी.

डॉक्टर खूबचंद बघेल राष्ट्रीय आंदोलन में हिस्सा लेने के साथ ही एक समाज सुधारक भी थे. डॉक्टर खूबचंद बघेल के साथ ही उनकी माता और उनकी पत्नी भी जेल गईं थीं. सन 1951 में अविभाजित मध्य प्रदेश जब हुआ करता था,तब डॉक्टर खूबचंद बघेल विधानसभा के सदस्य भी रहे. इसके साथ ही खूबचंद बघेल ने राज्यसभा में भी अपनी पहचान बनाई थी.

22 फरवरी को मनाई जाएगी पुण्यतिथि

इतिहासकार डॉक्टर रमेंद्रनाथ मिश्र कहते हैं, “डॉक्टर खूबचंद बघेल स्वतंत्रता आंदोलन की लड़ाई में कई बार जेल गए. सविनय अवज्ञा आंदोलन के साथ ही भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भी उन्हें जेल जाना पड़ा था. आजादी के बाद डॉक्टर खूबचंद बघेल संस्कृति सचिव बनाए गए. बाद उन्होने ने मजदूरों की पार्टी में अपने आप को शामिल कर लिया. सन 1951 अविभाजित मध्य प्रदेश के दौरान विधानसभा के सदस्य भी वो रहे. राज्यसभा में भी डॉक्टर खूबचंद बघेल ने अपनी पहचान बनाई. सदन में छत्तीसगढ़ की आवाज को निर्भीकता के साथ उठाने के लिए वो जाने जाते थे. डॉक्टर खूबचंद बघेल अच्छे लेखक भी थे. उन्होंने नाटक भी लिखे. डॉक्टर खूबचंद बघेल ने अपनी लेखनी के माध्यम से लोगों का दिल भी जीता.”

डॉक्टर खूबचंद बघेल का जन्म 19 जुलाई सन 1900 को हुआ था

इतिहासकार डॉक्टर रमेंद्रनाथ मिश्र कहते हैं, “डॉक्टर खूबचंद बघेल छत्तीसगढ़ के एक पुरोधा थे. राजनीतिक सामाजिक और सांस्कृतिक जागृति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही.”

डॉक्टर खूबचंद बघेल का जन्म 19 जुलाई सन 1900 को हुआ था. 22 फरवरी 1969 को दिल्ली में उनका आकस्मिक निधन हुआ था. 22 फरवरी को डॉक्टर खूबचंद बघेल की पुण्यतिथि मनाई जाएगी. डॉक्टर खूबचंद बघेल एक ऐसा नाम है, जो राष्ट्रीय आंदोलन में छात्र जीवन में उन्होंने अपने आप को डाक्टरी की नौकरी छोड़कर समर्पित कर दिया था. डॉक्टर खूबचंद बघेल राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ने के कारण राष्ट्रीय आंदोलन में अपने और अपने परिवार को दांव पर लगाया था. खूबचंद बघेल को 1930 में 6 महीने की जेल हुई थी. इनकी माता जी भी देश सेवा में जेल गईं थीं. उनकी पत्नी राजकुंवर बाई को भी देश सेवा के लिए जेल जाना पड़ा था. राष्ट्रीय आंदोलन को लेकर परिवार के तीन लोग एक साथ जेल जाए ऐसा कम ही देखने को मिलता है.”

एक नेता और समाज सुधारक के रूप में पूजे जाते हैं खूबचंद बघेल जी

डॉक्टर खूबचंद बघेल एक समाज सुधारक भी थे. जब महात्मा गांधी 1933 में रायपुर आए थे. उस समय छुआछूत को दूर करने में भी अहम भूमिका डॉक्टर खूबचंद बघेल ने निभाई थी. डॉक्टर खूबचंद बघेल ने एक नाटक भी लिखा था. जिसका नाम था ऊंच नीच नाटक. छुआछूत पर ही आधारित था. यह नाटक काफी लोकप्रिय भी हुआ ऊंच नीच नाटक का ने समाज को एक प्रकार से झकझोर कर रख दिया. बंगाली और चंदखुरी में डॉक्टर खूबचंद बघेल के द्वारा लिखे गए नाटक उच नीच का मंचन हुआ था. उस समय हजारों की तादाद में लोग इस नाटक को देखने के लिए बैठे हुए थे. इस नाटक के माध्यम से डॉक्टर खूबचंद बघेल को छुआछूत को दूर करने में मदद मिली थी.

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