Chhattisgarh Assembly: अलसी बीज वितरण में भ्रष्टाचार के आरोप, विधायक उमेश पटेल ने सदन में उठाई जांच की मांग; जानें क्या है पूरा विवाद

छत्तीसगढ़

रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार को श्रद्धांजलि के साथ शुरू हुई. अविभाजित मध्य प्रदेश की पूर्व विधायक मंगलीबाई रावटे के निधन पर सदन ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत सहित सभी सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें याद किया. इसके बाद सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी गई.

विधायक अजय चंद्राकर ने पूछा कृत्रिम गर्भाधान योजना पर सवाल

निर्धारित समय के बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई और प्रश्नकाल के दौरान गौवंशीय पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान की योजनाओं को लेकर चर्चा हुई. विधायक अजय चंद्राकर ने प्रदेश में गौवंशीय पशुओं की संख्या और सरकार की योजनाओं को लेकर सवाल उठाए.

मंत्री रामविचार नेताम ने दिया जवाब

इस पर जवाब देते हुए पशुपालन मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि प्रदेश में गौवंशीय पशुओं की संख्या लगभग 99.84 लाख है और कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को राष्ट्रीय औसत तक पहुंचाना है, जिसके लिए किसानों और पशुपालकों को अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से सहयोग दिया जा रहा है.

चिराग परियोजना को लेकर भी उठा सवाल

इस दौरान अजय चंद्राकर ने चिराग परियोजना को समय से पहले बंद किए जाने को लेकर भी सवाल उठाया. मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि यह योजना आदिवासी क्षेत्रों के किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण इसे बंद करने का फैसला लिया गया.

‘परियोजना फेल होने के जिम्मेदार दोषियों पर होगी कार्रवाई’

इस पर अजय चंद्राकर ने सवाल उठाते हुए पूछा कि परियोजना की असफलता के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है. मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत कई पदों पर भर्ती होनी थी, लेकिन इसमें कई स्तरों पर कमियां देखी गई. उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कराई जाएगी और वास्तविक दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी.

पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने भी सवाल किया

वहीं चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूछा कि परियोजना का समर्पण कब किया गया था. इस पर मंत्री नेताम ने बताया कि योजना के लिए विश्व बैंक से ऋण लिया गया था, लेकिन उसका केवल एक प्रतिशत ही उपयोग हो पाया. अंततः 26 मार्च 2025 को परियोजना का औपचारिक रूप से समर्पण कर दिया गया.

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