उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर इस बार सरकार ने एक बड़ा बदलाव करने का मन बना लिया है. अब तक नि:शुल्क रहने वाली ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया के लिए यात्रियों को अब चार्ज देना होगा. यह निर्णय यात्रा को सुव्यवस्थित करने और फर्जी रजिस्ट्रेशन की समस्या पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लिया जा रहा है.
सोमवार को ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में होटल एसोसिएशन, टूर एंड ट्रेवल्स यूनियन और अन्य हितधारकों के साथ हुई बैठक में गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने इस योजना का खुलासा किया. दरअसल, होटल संचालकों ने शिकायत की थी कि बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन तो करा लेते हैं, लेकिन यात्रा पर नहीं आते.
इस फर्जी रजिस्ट्रेशन की वजह से वास्तविक यात्रियों को स्लॉट नहीं मिल पाता और होटलों में बुकिंग होने के बावजूद वे पंजीकरण के अभाव में यात्रा शुरू नहीं कर पाते. इसी समस्या को खत्म करने के लिए न्यूनतम शुल्क लगाने का सुझाव दिया गया है.
कितना होगा शुल्क और कौन करेगा तय?
आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने बताया कि फर्जीवाड़े को रोकने के लिए न्यूनतम 10 रुपये का सांकेतिक शुल्क लेने का प्रस्ताव है. शुल्क का अंतिम निर्धारण करने के लिए गढ़वाल मंडल के अपर आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है. यह समिति एक-दो दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद सरकार की मंजूरी लेकर अंतिम फीस तय कर दी जाएगी.
इसी सप्ताह शुरू होगी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
यात्रा के इच्छुक श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात यह है कि इसी सप्ताह ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल खुलने की पूरी संभावना है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की कुल संख्या सीमित नहीं की जाएगी. यात्रा के लिए पंजीकरण कराना हर श्रद्धालु के लिए अनिवार्य होगा. पंजीकरण शुल्क लागू होने से भीड़ का सही अनुमान लगेगा, जिससे होटल और परिवहन की व्यवस्थाएं बेहतर होंगी.
सरकार का मानना है कि इस कदम से चारधाम यात्रा के दौरान ऋषिकेश से लेकर केदारनाथ-बद्रीनाथ तक उमड़ने वाली अनियंत्रित भीड़ पर काबू पाया जा सकेगा और स्थानीय व्यवस्थाओं पर भी दबाव कम होगा.
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