चंडीगढ़: चंडीगढ़ के इतिहास में जून में सबसे ज्यादा बारिश के बाद जुलाई आने के बाद सावन बेहद ही कम बरसा है। जुलाई में हुई कम बारिश के बाद अब मानसून सीजन में सामान्य से सिर्फ 6.7 फीसदी ही ज्यादा बारिश रह गई है।
जुलाई के पहले हफ्ते के बाद उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में मजबूत मानसून सिस्टम न बन पाने के कारण कम बारिश हो रही है। यही वजह है कि मंगलवार के लिए अच्छी बारिश की पूरी संभावनाओं के बाद भी शहर में बेहद मामूली पानी बरसा। सुबह बारिश के पूरे आसार बनने के बाद भी मौसम विज्ञान केंद्र में मात्र 2.4 मिलीमीटर पानी बरसा। अब आने वाले दिनों में बारिश की संभावनाएं फिर से कम बताई जा रही है लेकिन 3 अगस्त की फिर से मानसून के सक्रिय हो सकता है। इस साल का जून महीना चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा बारिश के तौर पर दर्ज हुआ। मानसून से पहले ही अच्छी बारिश हो चुकी थी और महीने के आखिरी तीन दिनों में जमकर बरसात हुई। पूरे जून के महीने 263.9 मिमी पानी बरसा। इस तरह इस जून में हुई बारिश ने जून 2013 में हुई 251.5 मिलीमीटर बारिश का रिकार्ड तोड़ा। लेकिन अब जुलाई के महीने में सिर्फ 170.5 फीसदी ही पानी बरसा। इस तरह 2 जुलाई तक शहर में सामान्य से 72 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी थी लेकिन जुलाई के महीने की कम बारिश के बाद अब सामान्य से सिर्फ 6.7 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। पहली जून से अभी तक 434.7 मि.मी. बारिश हुई ।
आसपास भारी बारिश से तबाही, यहां सामान्य से भी कम
पंजाब के हिमाचल के साथ लगते जिलों में भी अच्छी बारिश दर्ज हो रही है। हिमाचल में मानसून इस कद्र सक्रिय है कि भारी बारिश के बीच जान माल का बड़ा नुकसान हो रहा है। लेकिन उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में मानसून कमजोर है। इसकी वजह नमी की भारी मात्रा, हवाओं का रुख पूर्व से पहाड़ों की ओर होने और मानसून टर्फ के पंजाब हरियाणा के आसपास न आने जैसे कारणों से यहां कम बारिश हो रही है।
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