छिंदवाड़ा: एक बोरी सीमेंट की कीमत ज्यादा से ज्यादा क्या हो सकती है 300, 500 या 1000 रुपए? इतना भी बहुत ज्यादा है, लेकिन अगर यही सीमेंट की बोरी 1 लाख 92 हजार रुपए में खरीदी जाए, तो है न अजब-गजब माजरा. यह गजब कारनामा छिंदवाड़ा की जुन्नारदेव विशाला ग्राम पंचायत में हुआ है. इसके अलावा विधायक निधि से बन रहे इस सामुदायिक भवन का कोई नक्शा नहीं है. जो निर्माण चल रहा है, उसको देखकर नहीं कहा जा सकता कि ये सामुदायिक भवन बन रहा है.
5 लाख रुपए में खरीदी 3 बोरी सीमेंट
जुन्नारदेव विकासखंड के जुन्नारदेव विशाला ग्राम पंचायत में पहली पायरी के नाम से चौरागढ़ की पहाड़ियों की शुरुआत होती है. यहां पर जन सहयोग से शंकरजी की मूर्ति का भी निर्माण कराया जा रहा है. उसी के बगल में सामुदायिक भवन के लिए ग्राम पंचायत का काम चल रहा है. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की लागत 24 लाख रुपए है.
इसमें से अभी तक करीब 17 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं. ग्राम पंचायत ने सरकार के पोर्टल ‘पंचायत दर्पण’ में जो बिल अपलोड किया है, उसमें एक बोरी सीमेंट कीमत की 192,000 रुपए दिखाया है. इतना ही नहीं एक दिन में 3 बोरी सीमेंट खरीदी गई है. जिसकी कीमत 5 लाख 4 हजार रुपए बताई गई है. हैरानी की बात ये भी है कि ये बिल पास हो गया है.
सचिव ने बताया-बिल में कुछ और चीजें हो सकती हैं
इस मामले को लेकर ईटीवी भारत के संवाददाता ने जुन्नारदेव विशाला के सचिव महेश इनवाती से बात की. पहले तो उन्होंने कहा कि सरपंच और विधायक इसकी जानकारी देंगे, क्योंकि यह सामुदायिक भवन का निर्माण विधायक निधि से कराया जा रहा है और जनपद पंचायत इसकी एजेंसी है, लेकिन जब एक बोरी सीमेंट 1 लाख 92 हजार रुपए में खरीदने की बात पूछी, तो उन्होंने कहा कि “बिल में कुछ और भी चीज हो सकती है. मैं देख कर बताऊंगा.” पंचायत दर्पण में जो बिल अपलोड किया गया है. उसका विवरण ब्लर है. मूल रकम 1 लाख 92 हजार रुपए दिखाई जा रही है.
सामुदायिक भवन जैसा नहीं लग रहा है निर्माणाधीन भवन
पंचायत द्वारा 1 दिसंबर 2023 को 3 बोरी सीमेंट के अलग-अलग बिल अपलोड किए गए हैं. जिसमें 192,000 रुपए की कीमत की 2 अलग-अलग बोरिया हैं जबकि तीसरी बोरी की कीमत 1 लाख 20 हजार रुपए दिखाई गई है. इसके अलावा विधायक निधि से फंड सामुदायिक भवन के लिए स्वीकृत हुआ है, लेकिन मौके पर इसका नक्शा नहीं है.
सरपंच ने बेवजह बदमान करने का लगाया आरोप
जुन्नारदेव विशाला के सरपंच शंकर कमरे ने बताया कि “सामुदायिक भवन के पिलर नियमानुसार ही खड़े किए गए हैं. क्योंकि यह एक धार्मिक स्थल है और यहां शंकर जी की मूर्ति का निर्माण हो रहा है. उसके पास ही हम सामुदायिक भवन बन रहा है. राजनीतिक दुश्मनी के चलते लोग इसे गलत तरीके से परिभाषित कर रहे हैं. 16 लाख 80 हजार रुपए अभी तक खर्च हो चुका है. सीमेंट का भी पेमेंट देना बाकी है. मुझे बेवजह बदनाम किया जा रहा है.”
कलेक्टर ने जांच के लिए जारी किया नोटिस
ईटीवी भारत के संवाददाता ने इस मामले को लेकर छिंदवाड़ा कलेक्टर हरेंद्र नारायण से भी सवाल किया. हरेंद्र नारायण ने बताया कि “ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि सामुदायिक भवन की जगह मंदिर का निर्माण किया जा रहा है. संबंधित अधिकारियों को इस मामले में जांच के लिए नोटिस जारी किया गया है, क्योंकि जहां सामुदायिक भवन बना है, वहां पर उसका स्ट्रक्चर नहीं है. ऐसे में जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों से पूरी रकम रिकवर की जाएगी.”
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