दुर्ग जिले के भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में 250 टन लौह स्क्रैप चोरी का मामला एक बड़े संगठित अपराध में बदलता जा रहा है। अब तक पुलिस ने 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। इस मामले ने न केवल प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोली है, बल्कि सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
🚛 GPS हटाकर दिया जा रहा था चोरी को अंजाम
पुलिस जांच में सामने आया है कि चोरी के लिए एक बेहद शातिर तरीका अपनाया गया था। ट्रांसपोर्टर संजय सिंह ने खुलासा किया कि ट्रक पहले प्लांट में जाकर फ्लू डस्ट लोड करते थे, जिसके बाद रास्ते में ही जीपीएस (GPS) निकाल दिया जाता था। जीपीएस हटने के बाद वाहन स्क्रैप यार्ड पहुँचते, जहाँ चोरी का लोहा लोड कर उसके ऊपर फिर से फ्लू डस्ट डाल दी जाती थी। इसके बाद ट्रक वापस आकर जीपीएस लगा लेते और सुरक्षित बाहर निकल जाते थे।
🔍 अधिकारियों की भूमिका पर भी पुलिस की पैनी नजर
एसएसपी विजय अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि मामले की एंड-टू-एंड जांच की जा रही है। आरोपियों के बैंक खातों को सीज करने के साथ ही कॉल डिटेल्स (CDR) और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या इसमें बीएसपी के अधिकारी या सुरक्षाकर्मी शामिल हैं, तो उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
⚖️ सरकार और प्रशासन सख्त
इस मामले पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि सरकार पूरी गंभीरता से कार्रवाई कर रही है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। लगातार हो रही गिरफ्तारियों और खुलासों से साफ है कि यह चोरी कोई छोटी घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा थी जो लंबे समय से सक्रिय था।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
