भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़े जाने संबंधी अपने हालिया बयान पर सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी किसी भी टिप्पणी से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उन्हें बिना किसी संकोच के क्षमा मांगने में कोई आपत्ति नहीं है।
‘CM योगी का दावा सही, मेरे अधूरे जवाब से हुआ विवाद’
सिंह ने अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दावे का पूरा समर्थन किया। इससे पहले उन्होंने कहा था कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर कभी नमाज नहीं पढ़ी गई। इस पर सफाई देते हुए पूर्व सांसद ने कहा, “हमें उसी समय यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए था कि नमाज सीढ़ियों पर नहीं, बल्कि 52 बीघा परिसर अथवा किसी संत के स्थान पर पढ़ी गई थी।” सिंह ने माना कि उनके अधूरे जवाब के कारण यह बेवजह विवाद पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान बिल्कुल सही है और इसके साथ ही अयोध्या के संतों की बात भी अपनी जगह सही है। उनका आशय कभी भी मुख्यमंत्री के कथन का विरोध करना नहीं था।
‘भावनाओं को ठेस पहुंची तो मांगता हूं माफी’
पूर्व सांसद ने कहा कि यदि उनके बयान से ऐसा लगा कि वह मुख्यमंत्री की बात काट रहे हैं या इससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो वह इसके लिए क्षमा चाहते हैं। उन्होंने खुद को हनुमान जी का परम भक्त बताया और कहा कि अयोध्या की पावन भूमि से उनका बहुत गहरा और भावनात्मक संबंध है।
हनुमानगढ़ी के निर्माण वाले दावे पर भी दिया स्पष्टीकरण
हनुमानगढ़ी का निर्माण एक मुसलमान द्वारा कराए जाने संबंधी अपने पुराने बयान पर भी सिंह ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनके मुंह से यह बात निकली थी कि इसका निर्माण एक मुस्लिम ने कराया था, लेकिन यह जानकारी अधूरी थी। ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए उन्होंने बताया कि 18वीं शताब्दी में शुजाउद्दौला ने नागा साधुओं को 52 बीघा भूमि का पट्टा दिया था और निर्माण कार्य में सहयोग किया था, जिसे बाद में गलत तरीके से हनुमानगढ़ी के पूर्ण निर्माण से जोड़ दिया गया।
क्या था CM योगी का आरोप और पुराना विवाद?
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में अपनी कई चुनावी रैलियों में समाजवादी पार्टी (SP) पर बार-बार आरोप लगाया था कि 2003 में सपा के शासनकाल में हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाई गई थी। इसी बीच, बीते 17 जुलाई को बृजभूषण शरण सिंह ने संवाददाताओं से कह दिया था कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर कभी नमाज नहीं पढ़ी गई और इसका निर्माण भी एक मुसलमान ने ही करवाया था। इसी बयान के बाद यह राजनीतिक विवाद शुरू हुआ था, जिस पर अब उन्होंने पूरी तरह से विराम लगा दिया है।
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