इस्लामाबाद/वाशिंगटन: पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में जारी गंभीर मानवाधिकार हनन और पाकिस्तानी सेना के बर्बर अत्याचारों के बीच अब संयुक्त राज्य अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं।
बलूच मानवाधिकार संगठनों और शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व का कहना है कि आतंकवाद से लड़ने के नाम पर अमेरिका से प्राप्त घातक हथियारों का दुरुपयोग कर पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान की आम अवाम का बर्बरतापूर्वक दमन कर रही है। ऐसे नाजुक समय में वाशिंगटन की निरंतर रहस्यमयी चुप्पी ने वैश्विक मंच पर कई बड़े नैतिक प्रश्न खड़े कर दिए हैं। बलूच संगठनों का दावा है कि इन हमलों में जान गंवाने वाले अधिकांश लोग निर्दोष आम नागरिक थे, जिनमें महिलाएं और मासूम बच्चे शामिल हैं। यह खूनी कार्रवाई ठीक उस समय अंजाम दी गई, जब बलूच अवाम अपना स्वतंत्रता दिवस मना रही थी।
✈️ अमेरिकी F-16 फाइटर जेट्स के इस्तेमाल पर फूटा आक्रोश, मासूमों के कत्लेआम का लगा आरोप
पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा इस सुनियोजित खूनी हमले में अमेरिका निर्मित अत्याधुनिक F-16 लड़ाकू विमानों (F-16 Fighter Jets) का खुलकर इस्तेमाल किया गया।
बलूच नेतृत्व ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को जो उन्नत सैन्य साजो-सामान और फाइटर जेट्स दिए गए थे, उनका उपयोग आतंकवादियों के खिलाफ न होकर निहत्थे बलूच नागरिकों के नरसंहार में किया जा रहा है। इससे पूर्व भी खैबर-पख्तूनख्वा और अन्य अशांत सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना द्वारा अपने ही नागरिकों के विरुद्ध इन अमेरिकी युद्धक विमानों के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
📜 बलूच नेता मीर यार बलूच ने ट्रंप प्रशासन को घेरा, सैन्य मदद व F-16 स्पेयर पार्ट्स पर तुरंत रोक लगाने की मांग
इस बर्बर घटना के उपरांत प्रमुख बलूच नेता मीर यार बलूच ने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए तत्काल चार सूत्रीय सख्त कदम उठाने की मांग की है:
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सैन्य एवं वित्तीय मदद पर पूर्ण रोक: पाकिस्तान को दिए जाने वाले सभी प्रकार के रक्षा साजो-सामान, उन्नत हथियार प्रणालियों और वित्तीय सहायता की तत्काल समीक्षा कर उस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
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F-16 स्पेयर-पार्ट्स व मेंटेनेंस सपोर्ट बंद हो: पाकिस्तानी वायुसेना के F-16 बेड़े के इंजन सपोर्ट, तकनीकी अपग्रेड प्रोग्राम और कलपुर्जों (स्पेयर पार्ट्स) की आपूर्ति को अमेरिका तत्काल प्रभाव से रोके।
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युद्ध अपराधों की अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही: बलूच नागरिकों के खिलाफ किए जा रहे मानवाधिकार हनन और सुनियोजित कत्लेआम के लिए पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में युद्ध अपराधों (War Crimes) का दोषी ठहराया जाए।
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आतंकवाद प्रायोजक देश घोषित करना: पाकिस्तान पर कड़े बहुपक्षीय आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएं और उसे आधिकारिक तौर पर ‘स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेररिज्म’ (आतंकवाद का प्रायोजक देश) घोषित किया जाए।
🌐 गाजा जैसी तबाही का दिया हवाला, अंतरराष्ट्रीय अदालतों और पड़ोसी मुल्कों से मांगी मदद
बलूच नेतृत्व ने अब इस दमनकारी नीति के विरुद्ध अपना प्रतिरोध केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रखकर इसे वैश्विक कूटनीतिक मंचों तक पहुँचा दिया है।
हमलों के पश्चात मलबे और विभीषिका की सामने आई दिल दहला देने वाली तस्वीरों की तुलना गाजा में मची तबाही से करते हुए बलूच नेताओं ने अमेरिका, अफगानिस्तान और अन्य पड़ोसी लोकतांत्रिक राष्ट्रों से अंतरराष्ट्रीय मंचों व अदालतों में बलूचिस्तान के पक्ष में खड़े होने की भावुक अपील की है।
⚖️ क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बदलेंगे अपनी नीति? व्हाइट हाउस के अगले कदम पर टिकीं नजरें
चूंकि संयुक्त राज्य अमेरिका के पास पाकिस्तान के सैन्य हार्डवेयर और विशेष रूप से उसके F-16 बेड़े की तकनीकी लाइफलाइन को नियंत्रित करने का पूर्ण अधिकार और क्षमता है, इसलिए समूचे बलूचिस्तान और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की निगाहें अब सीधे व्हाइट हाउस पर टिकी हैं।
यह देखना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा कि क्या नवनिर्वाचित ट्रंप प्रशासन मानवाधिकारों की रक्षा और अमेरिकी हथियारों के दुरुपयोग को संज्ञान में लेते हुए इस्लामाबाद के खिलाफ कोई कड़ा रुख अपनाता है या फिर भू-राजनीतिक हितों के चलते इस खूनी खेल पर अपनी आंखें मूंदे रहता है।
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