बिटक्वाइन की कीमत ने तीन महीने का रिकॉर्ड तोड़ दिया. शेयर बाजार और सोने-चांदी के बीच बिटक्वाइन ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए 80,000 डॉलर के पार चला गया है. एशियन मार्केट में तेजी का असर बिटक्वाइन पर दिखा है. इससे पहले बिटक्वाइन ने पिछले साल अक्टूबर ने 1,26,000 डॉलर का रिकॉर्ड बनाया था. उसके बाद इसमें गिरावट आनी शुरु हुई और गिरते-गिरते यह 60,000 डॉलर तक आ गया था.
एशियाई शेयर बाजार के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के साथ ही बिटकॉइन तीन महीने से ज्यादा समय में पहली बार 80,000 डॉलर के ऊपर चला गया. सोमवार सुबह सिंगापुर में यह डिजिटल करेंसी करीब 1.9% बढ़कर 80,393 डॉलर तक पहुंच गई, जो 31 जनवरी के बाद इसका सबसे ऊंचा लेवल है. ईथर जैसे दूसरे क्रिप्टो टोकन में भी तेजी देखने को मिली.
यह बढ़त ऐसे समय आई है जब एमएससीआई एशियन इक्विटी इंडेक्स फरवरी में बने अपने ऑल-टाइम हाई के करीब पहुंच गया है. उस समय अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव शुरू होने वाला था. पिछले हफ्ते टेक कंपनियों के अच्छे कॉर्पोरेट रिजल्ट ने भी मार्केट को मजबूत रखा.
क्यों बढ़ा बिटक्वाइन?
ईरान को लेकर मार्केट में मिली-जुली रिएक्शन देखने को मिल रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले कुछ जहाजों को सुरक्षित निकालने में मदद करेगा. लेकिन एक ईरानी अधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने दखल दिया तो इसे सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा. पिछले साल अक्टूबर में बिटकॉइन की कीमत 126,000 डॉलर से ऊपर चली गई थी, लेकिन उसके बाद कई महीनों तक गिरावट आई और फरवरी में यह करीब 60,000 डॉलर तक आ गया. अब इंस्टिट्यूशनल डिमांड बढ़ने से बिटकॉइन फिर धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है.
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को अमेरिका के बिटकॉइन ETF में 630 मिलियन डॉलर का नेट इनफ्लो आया. क्रिप्टो निवेश फर्म के एक एक्सपर्ट के अनुसार, ट्रेडर्स इस उम्मीद से उत्साहित हैं कि अमेरिका में स्टेबलकॉइन यील्ड से जुड़े नियमों पर सहमति बन सकती है. इससे नया क्रिप्टो कानून आगे बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि 80,000 डॉलर का लेवल एक बड़ा मनोवैज्ञानिक बैरियर रहा है.
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