राजधानी रांची से एक बेहद प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली सफलता की कहानी सामने आई है। किसी ने बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए अपनी जिंदगी के 26 साल कड़े संघर्ष में बिता दिए, तो किसी ने उन्हीं मुश्किलों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखकर एक नई मिसाल कायम कर दिखाई। रांची के तुरुप गांव की रहने वाली आरती कुमारी की यह कहानी हर किसी को प्रेरित करने वाली है। उनकी मां रानू देवी पिछले 26 वर्षों से बीआईटी मेसरा (BIT Mesra) संस्थान में सफाईकर्मी के रूप में ईमानदारी से काम कर रही हैं और अब उनकी बेटी आरती ने इसी प्रतिष्ठित संस्थान से इंजीनियरिंग में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर ली है।
👩🎓 तुरुप गांव की पहली महिला बनीं आरती, मां के त्याग और बेटी की लगन लाई रंग
आरती की यह शानदार उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे तुरुप गांव और समाज के लिए गर्व का विषय है। वह अपने गांव की पहली ऐसी महिला बन गई हैं जिन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पीएचडी की डिग्री हासिल की है। आरती के लिए यह सफर केवल एक डिग्री पाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे परिवार की आर्थिक तंगी, मां का अंतहीन संघर्ष, खुद की अटूट लगन और बीआईटी मेसरा के शिक्षकों का भरपूर सहयोग शामिल है। संस्थान के दीक्षांत समारोह में उन्हें यह मानद उपाधि प्रदान की गई।
💰 400 रुपये साप्ताहिक वेतन से शुरू हुआ था सफर, मां के संघर्ष ने दी मंजिल
आरती की मां रानू देवी ने जब बीआईटी मेसरा में नौकरी की शुरुआत की थी, तब उन्हें एक सप्ताह के केवल 400 रुपये मिलते थे। पति के निधन के बाद तीनों बच्चों के पालन-पोषण का पूरा बोझ उन्हीं के कंधों पर आ गया था। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में कभी रुकावट नहीं आने दी। वर्तमान में उन्हें 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। तीन भाई-बहनों में मझली आरती ने आरटीसी से बीटेक और बीआईटी मेसरा से एमटेक करने के बाद अपना शोध कार्य पूरा किया। इस लंबी यात्रा में मां के त्याग और बेटी के समर्पण ने साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों तो हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।
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